राजस्थान के 11000 सरपंच 5 मई से 13 मई तक जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन और सभाएं करेंगे। विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे सरपंचों ने 15 मई को जयपुर में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की घोषणा की है। इससे पहले 4 मई को जयपुर में शहीद स्मारक पर सरपंच संघ पदाधिकारी और 33 जिलों के जिलाध्यक्ष सांकेतिक धरना देंगे।
राजस्थान के 11000 से ज्यादा सरपंचों ने 20 अप्रैल 2023 से चल रहे आंदोलन को तेज करने का निर्णय किया है। सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर गढ़वाल ने बताया कि राजस्थान की सरकार पिछले 3 सालों से पंचायती राज संस्थाओं और उनके चुने हुए जनप्रतिनिधियों को लगातार कमजोर करने का काम कर रही है।
अनुदान के 2533 करोड़ रुपए में से एक रुपया भी नहीं दिया- नेमीचंद
सरपंच संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नेमी चंद मीणा ने बताया कि वर्तमान सरकार द्वारा साल 2022– 23 के राज्य वित्त आयोग अनुदान के 2533 करोड़ रुपए में से एक भी रुपया पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2022–23 के केंद्रीय वित्त आयोग की द्वितीय किस्त के 1500 करोड़ रुपए का भी पिछले 2 महीने से राज्य सरकार उपयोग कर रही है। इस प्रकार पंचायती राज संस्थाओं के 4000 करोड़ रुपए का राज्य सरकार अपने अन्य कार्यों के लिए उपयोग कर ग्रामीण आबादी के विकास में बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न कर रही है।
ग्राम पंचायतों के वित्तीय हालात बद से बदतर-रोशन अली
1.50 लाख जनप्रतिनिधियों को मानदेय देने के लिए पैसा नहीं
सरपंच संघ के प्रदेश महामंत्री शक्ति सिंह रावत ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं पर निर्भर 1.50 लाख जनप्रतिनिधियों और 20 हजार संविदा कार्मिकों को मानदेय भत्ते देने के लिए भी राशि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सरपंचों को जनता की मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति करने में भी बहुत अधिक परेशानी हो रही है।
लगातार बजट में कटौती
सरपंच संघ के मुख्य प्रवक्ता रफीक पठान ने बताया कि देश की ग्रामीण आबादी को रोजगार उपलब्ध करवाने की सबसे बड़ी योजना मनरेगा का पिछले 17 सालों से पंचायती राज संस्थाएं सफल संचालन कर रही हैं, लेकिन वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार दोनों लगातार बजट में कटौती कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिदिन हजारों श्रमिकों के काम करने के बावजूद ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही है, इस कारण वे श्रम राशि से वंचित हो रहे हैं। इस बारे में कई बार आग्रह किया है, लेकिन फिर भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है। प्रदेश के लाखों कुशल श्रमिकों और सामग्री की राशि का 1 वर्ष से ज्यादा समय बीत के बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। प्रदेश की हजारों ग्रामपंचायत ऐसी हैं, जिनमें मनरेगा के श्रमिकों की संख्या 3000 से ज्यादा है। लेकिन प्रति ग्राम पंचायत सिर्फ 20 कार्य स्वीकृत करने की बाध्यता करने के कारण श्रमिकों के नियोजन में भी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न कर रही हैं।
पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजना के लाभ से वंचित रखा
सरपंच संघ के जयपुर जिला अध्यक्ष मेहर सिंह धनकड ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्रचार प्रसार करवाकर खाद्य सुरक्षा योजना में 20 लाख से ज्यादा पात्र परिवारों का सर्वे करवाकर अपील दर्ज करवा दी गई। लेकिन आज तक उनकी अपीलों पर निर्णय नहीं हुआ, जिस वजह से बड़ी संख्या में पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजना के लाभ से वंचित रखा जा रहा है।
आंदोलन के चरण