राजस्थान में बाड़मेर जिले की बायतू सीट से विधायक और दक्षिण भारत में कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन हरीश चौधरी से अमर उजाला ने राजस्थान के चुनावों को लेकर बातचीत की। राजस्थान के चुनाव इस बार किन मुद्दों पर होंगे। ईआरसीपी और राजस्थान में जाति टारगेट के सवालों पर जानिए क्या बोले विधायक हरीश चौधरी।
राजस्थान के लोकसभा चुनाव किस दिशा में जा रहे हैं और यहां किन मुद्दों पर लड़े जाएंगे?
राजस्थान में राजस्थान के मुद्दों और देश के मुद्दों पर चुनाव लड़े जाने चाहिए, ऐसा मेरा मानना है। बीजेपी की प्रोपोगेंडा मशीन प्रयास कर रही है कि राजस्थान के मुद्दों पर चुनाव न लड़ा जाए। ईआरसीपी के अंतर्गत राजस्थान और एमपी के बीच जो समझौता हुआ है, उसमें राजस्थान के हिस्से में कटौती की गई और ये दुष्प्रचार कर रहे हैं कि जैसे बहुत बड़ी कामयाबी मिल गई। राजस्थान में चल रही तमाम योजनाएं बंद हो गई हैं। आज राजस्थान में पिछले तीन महीने से सिर्फ द्वेषपूर्ण भावना से फैसले हो रहे हैं।
जातिगत नाराजगी की भी यहां बात की जा रही है कि जो तबादले हुए उसमें एक वर्ग को विशेष रूप से टागरेट किया गया। अब इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी काफी कुछ कहा जा रहा है?
किसी वर्ग को सरकार इस तरह से कार्रवाई करके संदेश देना चाह रही है तो यह किसी को भी मान्य नहीं होना चाहिए। पहले भी इस वर्ग को पोस्टिंग में कोई खास तरजीह नहीं मिली थी, लेकिन अल्प आय वर्ग के लोगों को हजार किलोमीटर दूर भेजना मुझे नहीं लगता सही फैसला है।
जोधपुर डिविजन से किसी को मंत्री नहीं बनाया गया। क्या इसे लेकर भी कोई नाराजगी है वहां? चुनावों पर इसका क्या असर देखते हैं आप?
जोधपुर संभाग में आजादी के बाद यह पहला मंत्रिमंडल है जिसमें जाट जाति, मेघवालों जैसी एससी की बड़ी जाति का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। इनमें से एक को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई। ये फैसला कर सरकार क्या बताना चाहती है, ये समझ से परे है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ईआरसीपी को लेकर धन्यवाद सभाएं कर रहे हैं। विधानसभा से पहले यह कांग्रेस का मुद्दा था?
ये गलत तथ्य लेकर लोगों के बीच में जा रहे हैं। हमने एमपी के सामने सरेंडर किया है। राजस्थान की जनता यह अच्छी तरह समझ चुकी है और आने वाले दिनों में इसे देखकर ही फैसला लेगी।
इस बार यह भी चर्चा है कि कांग्रेस लोकसभा चुनावों में कुछ बड़े चेहरों को उतारा सकती है। इसको लेकर भी क्या कोई तैयारियां की जा रही है?
कांग्रेस हर लोकसभा के अंतर्गत सबसे मजबूत प्रत्याशी का आंकलन कर रही है। बड़ा और छोटा कुछ नहीं होता। लोगों की नजरों में बड़ा कौन है उसके आधार पर टिकट का आकलन होगा।