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Rajasthan: पांच अप्रैल को रावणा राजपूत समाज ने पुष्कर में बुलाई महापंचायत, सबकी निगाहें बैठक पर टिकी

Sat, 04 Apr 2026 10:15 AM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

 Rajasthan: रावणा राजपूत समाज 5 अप्रैल को पुष्कर में महापंचायत आयोजित कर रहा है, जिसमें भजन गायक छोटू सिंह रावणा और शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी के विवाद पर फैसला हो सकता है।
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भजन गायक छोटू सिंह रावणा और शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान में रावणा राजपूत समाज एक बार फिर संगठित शक्ति का प्रदर्शन करने जा रहा है। 5 अप्रैल को पुष्कर में आयोजित होने वाली महापंचायत में समाज कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन करेगा, जिसमें भजन गायक छोटू सिंह रावणा और शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी के बीच चल रहा विवाद प्रमुख रूप से शामिल है।

छोटू सिंह रावणा को फोन पर दी गई धमकियां

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रावणा राजपूत समाज के प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह सोडाला ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज के सम्मान से जुड़ा विषय बन चुका है। उन्होंने बताया कि छोटू सिंह रावणा ने उन्हें फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी और आरोप लगाया कि उन्हें तीन बार फोन पर धमकियां दी गईं।

अपमानजनक व्यवहार ने स्थिति को बिगाड़ा
रणजीत सिंह सोडाला के अनुसार, अगर संवाद सम्मानजनक तरीके से होता तो विवाद सुलझ सकता था, लेकिन लगातार अपमानजनक व्यवहार और दबाव ने स्थिति को बिगाड़ दिया। उन्होंने कहा कि पूरा समाज छोटू सिंह रावणा के साथ खड़ा है और इस मामले को महापंचायत में प्रमुखता से उठाया जाएगा।
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'रावणा समाज के साथ किया जा रहा भेदभावपूर्ण'
सोडाला ने यह भी आरोप लगाया कि रावणा राजपूत समाज के साथ आज भी भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के 80 वर्ष बाद भी समाज को बराबरी और सम्मान नहीं मिला है। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में इस समाज की संख्या 60 लाख से अधिक है और लगभग 60 विधानसभा सीटों पर इसका सीधा प्रभाव है, इसके बावजूद राजनीतिक दलों ने समाज को केवल 'उपयोग' तक सीमित रखा है।

उन्होंने सीकर क्षेत्र की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहां समाज के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति के साथ सामाजिक बहिष्कार की बात सामने आई है, जो बेहद चिंताजनक है। इस तरह की घटनाएं समाज में आक्रोश बढ़ा रही हैं।

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बड़ा कदम उठा सकता है समाज
महापंचायत को लेकर सोडाला ने स्पष्ट किया कि इसमें केवल विवादित मुद्दा ही नहीं, बल्कि समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सामाजिक सम्मान और भविष्य की रणनीति पर भी निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उपेक्षा और अपमान का सिलसिला जारी रहा, तो रावणा राजपूत समाज राजनीतिक रूप से भी बड़ा कदम उठा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज एकजुट है और एक आवाज पर निर्णय लेने की क्षमता रखता है। ऐसे में महापंचायत का फैसला आगामी राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों पर असर डाल सकता है।

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