राजस्थान पुलिस महकमे में हुए ताजा आईपीएस तबादलों ने एक बार फिर खाकी और खादी के रिश्तों को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है। कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों के तबादले ऐसे समय में किए गए हैं जब कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों के कामकाज को लेकर नाराजगी और शिकायतें सामने आ रही थीं। इन बदलावों के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
ममता गुप्ता को जयपुर में नई जिम्मेदारी
राजसमंद एसपी ममता गुप्ता का तबादला कर उन्हें डीआईजी सुरक्षा, जयपुर के पद पर नियुक्त किया गया है। ममता गुप्ता के खिलाफ राजसमंद सांसद महिमा कुमारी द्वारा कई बार सरकार से शिकायत की गई थी। हालांकि उस समय गृह विभाग ने इन शिकायतों को गलत बताया था। इसके बावजूद अब उनके तबादले के निर्णय को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
उदयपुर में बदली पुलिस कमान
उदयपुर के एसपी योगेश गोयल का तबादला कर उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) में एसपी के पद पर भेजा गया है। उनकी जगह अमृता दुहन को उदयपुर एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अमृता दुहन इससे पहले श्रीगंगानगर की एसपी के रूप में कार्यरत थीं और अब उन्हें उदयपुर जैसे महत्वपूर्ण जिले की कमान दी गई है।
नारायण टोगस को पदोन्नति के साथ नई पोस्टिंग
जोधपुर ग्रामीण के एसपी नारायण टोगस का तबादला कर उन्हें डीआईजी एसीबी (अजमेर) के पद पर नियुक्त किया गया है। नारायण टोगस को हाल ही में पदोन्नति भी मिली थी। उनके कार्यकाल के दौरान कुछ सत्ताधारी नेताओं ने उनके कामकाज को लेकर नाराजगी जताते हुए सरकार को पत्र भी लिखे थे। इसके बावजूद उन्हें प्रमोशन के साथ नई जिम्मेदारी दी गई है।
जोधपुर ग्रामीण में नई नियुक्ति
जोधपुर कमिश्नरेट में डीसीपी पीडी नित्या को जोधपुर ग्रामीण एसपी बनाया गया है। यह बदलाव भी पुलिस विभाग में किए गए व्यापक प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा माना जा रहा है। इससे जोधपुर ग्रामीण जिले में पुलिस नेतृत्व में बदलाव आया है।
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नागौर और बीकानेर में भी बदलाव
नागौर एसपी मृदुल कच्छावा का आठ महीने से भी कम समय में तबादला कर दिया गया है। उन्हें 19 जुलाई 2025 को भरतपुर से नागौर एसपी बनाया गया था, लेकिन अब उनका स्थानांतरण बीकानेर एसपी के पद पर कर दिया गया है। इस बदलाव को भी हालिया प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा माना जा रहा है।
खाकी और खादी के समीकरणों पर चर्चा
इन तबादलों के बाद राजनीतिक गलियारों में खाकी और खादी के बीच संतुलन साधने की चर्चा भी तेज हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन कई मामलों में जनप्रतिनिधियों की नाराजगी और शिकायतों का संदर्भ भी चर्चाओं में बना हुआ है।