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Rajasthan: रिहायशी जमीन पर बिजनेस का खेल! जयपुर की टाउनशिप विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, नगर निगम पर उठे सवाल

Thu, 04 Jun 2026 02:26 PM IST
Ashutosh Pratap Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला,जयपुर

सार

जयपुर की निजी रियल एस्टेट कंपनी राजदरबार पिंकसिटी डेवलपमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने रिहायशी उपयोग के लिए स्वीकृत भूमि पर कथित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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जयपुर की एक निजी रियल एस्टेट कंपनी ने रिहायशी उपयोग के लिए निर्धारित भूमि पर कथित रूप से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी ने सर्वोच्च न्यायालय से मांग की है कि जयपुर नगर निगम (ग्रेटर) को मामले की जांच करने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए।
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यह आवेदन सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले लोगनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य एवं अन्य में दायर किया गया है। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2026 में सभी राज्य राजधानियों के नगर निकायों को उन रिहायशी क्षेत्रों की पहचान करने का निर्देश दिया था, जहां कथित रूप से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। साथ ही उनसे अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई थी।

चिमनपुरा की जमीन को लेकर विवाद

याचिका दायर करने वाली कंपनी राजदरबार पिंकसिटी डेवलपमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने दावा किया है कि उसके पास जयपुर जिले के भांकरोटा क्षेत्र के गांव चिमनपुरा स्थित कुछ भूमि के विशेष विकास अधिकार हैं। कंपनी का आरोप है कि इस जमीन पर कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं, जिनमें फर्नीचर शोरूम, बुटीक, सैलून, भोजनालय और रेडीमेड कपड़ों की दुकानें शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि यह भूमि केवल आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत है और वहां व्यावसायिक गतिविधियां नियमों के विपरीत हैं।
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टाउनशिप योजना के तहत विकसित की जानी थी कॉलोनी

कंपनी के अनुसार संबंधित भूमि राजस्थान की टाउनशिप योजना के तहत एक निजी आवासीय टाउनशिप विकसित करने के लिए चिन्हित की गई थी। कंपनी ने दावा किया कि वर्ष 2005 में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) द्वारा जारी आदेशों के माध्यम से उसके विकास अधिकारों को मान्यता भी दी गई थी। याचिका में कंपनी ने आरोप लगाया है कि उसने कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायतें दीं, जेडीए अपीलीय न्यायाधिकरण में मामला उठाया और राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन इसके बावजूद कथित अवैध निर्माणों और व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

जेडीए ट्रिब्यूनल ने दिए थे निरीक्षण के निर्देश

कंपनी ने बताया कि जनवरी 2025 में उसने जेडीए अपीलीय न्यायाधिकरण में आवेदन देकर कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। मई 2025 में न्यायाधिकरण ने संबंधित स्थल का निरीक्षण कर अवैध निर्माण पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद कंपनी ने जयपुर नगर निगम (ग्रेटर) को भी कई ज्ञापन दिए और बाद में राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया।

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हाईकोर्ट ने दो महीने में निर्णय लेने को कहा था

कंपनी के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट ने 4 फरवरी 2026 को संबंधित निकायों को निर्देश दिया था कि वे दो महीने के भीतर उसकी शिकायत पर कारणयुक्त आदेश जारी करें। हालांकि कंपनी का आरोप है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई निर्णय उसे नहीं बताया गया। कंपनी ने कहा है कि वह इस संबंध में आगे भी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।
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सुप्रीम कोर्ट से मांगे विशेष निर्देश

कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर कर मामले में अपनी बात रखने की अनुमति मांगी है। इसके साथ ही एक अलग आवेदन में सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि जयपुर नगर निगम (ग्रेटर) को विवादित भूमि को 25 मार्च 2026 के आदेश के तहत दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में शामिल करने का निर्देश दिया जाए। कंपनी ने सर्वोच्च न्यायालय से मांग की है कि संबंधित भूमि पर कथित अवैध निर्माणों और व्यावसायिक गतिविधियों की जांच कराई जाए, भूमि की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए और यदि कोई अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधि पाई जाती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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