जयपुर में टूटी सड़कों और जल भराव को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर हाईकोर्ट ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि शहर की टूटी सड़कें गुलाबी नगरी की प्रतिष्ठा खराब कर रही है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुख्य सचिव, जेडीसी, व नियम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
बारिश में जर्जर हो चुकी जयपुर की सड़कें अब वाहन चलाने लायक तो दूसरी बार पैदल चलने लायक भी नहीं बची हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर की बदहाल हालत, मानसून में टूटी सड़कों और जलभराव की स्थिति को लेकर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया है। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की बेंच ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर प्रसंज्ञान लेते हुए कहा है कि शहर की टूटी सड़कें गुलाबी नगरी की प्रतिष्ठा खराब कर रही हैं। कोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि इस पर विचार किया जाए कि क्या जयपुर अपनी सुंदरता और विरासत के लिए पचहाना जाना चाहिए या फिर यह अपनी बुनियादी संरचना की समस्याओं के चलते एक डूबते शहर में बदल जाएगा। हाईकोर्ट ने इसे लेकर मुख्य सचिव सुधांश पंत, प्रमुख सचिव यूडीएच, जेडीसी, हेरिटेज व ग्रेटर नगर निगम आयुक्त को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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गौरतलब है, बुधवार शाम को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी अपने विधानसभा क्षेत्र सांगानेर में टूटी सड़कों का जायजा लिया। जल भराव के चलते उनका काफिला भी सांगानेर में काफी देर ट्रैफिक जाम में फंसा रहा। स्थानीय लोगों ने सीएम से शिकायत की कि सड़कें ठीक नहीं करवा सकते हैं तो कम से कम गड्ढे भरवा दीजिए।
बुधवार को जयपुर में भारी बारिश हुई। सड़कों की हालत पहले से ही जर्जर है, बारिश के चलते स्थिति और ज्यादा खराब हो गई। वैशाली नगर में जल भराव इतना ज्यादा था कि रोडवेज बसों के अंदर तक पानी आ रहा था। दुपहिया वाहन तो दूर की बात चौपहिया वाहन भी पानी में तैरते नजर आए। मानसून में सड़कों के हालात खराब कोर्ट ने आदेश में कहा कि मानसून में शहर की सड़कों के हालात खराब हो रहे हैं। जिससे उसकी विश्वव्यापी इमेज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। हर मानसून में यहां जलभराव, बाढ़ और जल निकासी की समस्या होती है। जल निकासी की समस्या से रोजमर्रा के जीवन, पर्यावरण के साथ-साथ स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी समस्या का समाधान करने में विफल हो गए हैं। शायद ही किसी ठेकादार को ब्लैकलिस्ट किया हो कोर्ट ने कहा कि सड़क निर्माण और उसके मेंटेनेंस के लिए पर्याप्त पैसे के आवंटन के बावजूद घटिया और कम गुणवत्ता के मेटेरियल का उपयोग किया जाता है। जिससे करदाताओं के पैसे के इस्तेमाल से बनने वाली सड़क अगले दिन ही क्षतिग्रस्त हो जाती है। यह लापरवाही को दर्शाती है। बिना निरीक्षण बिल पास करने वालों के नाम बताओ कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को कहा है कि वे चार सप्ताह में शहर की सड़कों की मरम्मत का समयबद्ध प्लान पेश करे। शहर में जलभराव की स्थिति खत्म करने और सीवरेज समस्या को हल करने की क्या योजना है। इसके साथ ही सड़क निर्माण में घटिया सामग्री और तकनीक अपनाने वाले,सड़क निर्माण के बाद बिना प्रभावी निरीक्षण के ही बिल पास करने वाले अधिकारियों के नाम बताने के निर्देश दिए हैं।