सरकार के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हुए कार्यक्रम के विरोध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रेस वार्ता के दौरान बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री का नाम तय करने का अधिकार केवल पार्टी आलाकमान का है और यह परंपरा अतीत में भी रही है तथा भविष्य में भी जारी रहेगी।
डोटासरा का यह बयान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोविंद मेघवाल के उस बयान के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि 2028 में कांग्रेस सरकार बनने पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही होंगे। इस पर डोटासरा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नाम को लेकर फैसला लेना पार्टी आलाकमान का काम है। कोई कुछ भी कहे, नाम का अंतिम निर्णय आलाकमान ही करेगा।
भाजपा सरकार पर तीखा हमला
प्रेस वार्ता के दौरान डोटासरा ने भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने राजस्थान में भाजपा के एक साल को पूरी तरह विफल करार देते हुए कहा कि 2028 के चुनाव में कांग्रेस की वापसी होगी। डोटासरा ने भाजपा पर जनहित के मुद्दों पर ध्यान नहीं देने और केवल राजनीति करने का आरोप लगाया।
एकजुटता का दावा, लेकिन गुटबाजी के संकेत
बुधवार को जयपुर में आयोजित कांग्रेस के बड़े धरना प्रदर्शन के दौरान पार्टी ने एकजुटता दिखाने का प्रयास किया था। हालांकि, मुख्यमंत्री के नाम को लेकर नेताओं के अलग-अलग बयानों ने एक बार फिर से पार्टी के अंदर गुटबाजी को उजागर कर दिया। इन बयानों ने पार्टी में चल रही आंतरिक खींचतान को हवा दी है, जिससे कांग्रेस की एकजुटता के दावे पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव से पहले बयानबाजी पर सवाल, चुनाव से चार साल पहले ही मुख्यमंत्री के नाम को लेकर हो रही बयानबाजी पार्टी के अति आत्मविश्वास को दर्शाती है। साथ ही यह भी संकेत देती है कि पार्टी के भीतर अभी भी नेतृत्व को लेकर स्पष्टता का अभाव है। डोटासरा के बयान ने यह तो स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस में आलाकमान की भूमिका निर्णायक है, लेकिन इसने गुटबाजी की बहस को और तेज कर दिया है। अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इसे किस प्रकार संभालता है।