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राजस्थान: प्रदेश में सूखे पर गहलोत का सरकार पर हमला: बोले- भगवान रूठ जाए तो जाए, सरकार को नहीं रूठना चाहिए

Mon, 19 Oct 2026 04:42 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान में सूखे और पशुओं के लिए चारे की कमी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने जल्द गिरदावरी, सूखा घोषित करने, किसानों को राहत देने और पशुओं के लिए चारा-पानी की व्यवस्था करने की मांग की।
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पूर्व सीएम अशोक गहलोत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के पश्चिमी इलाकों में सूखे के हालात को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल शर्मा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि किसानों और पशुपालकों को राहत दिलाने के लिए सरकार पर दबाव बनाना जरूरी है। फसल खराबे का आकलन कर जल्द सूखा घोषित किया जाना चाहिए, ताकि प्रभावित लोगों को राहत मिल सके। फलोदी में रविवार को आयोजित कार्यकर्ता और किसान सम्मेलन में गहलोत ने सूखे के साथ पंचायत चुनाव से पहले पंचायत राज संस्थाओं के परिसीमन पर भी सवाल उठाए।
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गहलोत ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में हालात गंभीर हैं। पशुधन की मौत हो रही है और जैसलमेर में चारे की कीमत 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। किसान और पशुपालक आजीविका चलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को जल्द गिरदावरी करवाकर सूखा घोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा, “कहावत है कि भगवान रूठ जाए तो रूठ जाए, लेकिन सरकार नहीं रूठनी चाहिए। अब लोग कहने लगे हैं कि भगवान और सरकार दोनों रूठ गए हैं।”

बाड़मेर में एक करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा पर भी सवाल

गहलोत ने कहा कि सूखा प्रभावित इलाकों के दौरे का मकसद सरकार पर राहत के लिए दबाव बनाना है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बाड़मेर दौरे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहां केवल एक करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की गई, लेकिन यह राशि अब तक जारी नहीं हुई है।
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पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान सूखे से निपटने के उपायों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय 16 अगस्त से राहत कार्य शुरू किए गए थे, जो 10 से 11 महीने तक चले। जरूरतमंद परिवारों को गेहूं वितरित किया गया। उन्होंने कहा कि लोगों को मिली उस सहायता को आज भी याद किया जाता है। गहलोत ने सरकार से पशु शिविर शुरू करने, चारे और पेयजल की व्यवस्था करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की।

उन्होंने ट्यूबवेल और हैंडपंप की तत्काल मरम्मत कराने की जरूरत भी बताई। गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रदेश आर्थिक संकट से गुजर रहा है और इंदिरा गांधी नहर परियोजना का काम ठेकेदारों का भुगतान नहीं होने के कारण प्रभावित हुआ है। उन्होंने पेंशन और सरकारी कर्मचारियों के बकाया भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया।

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मनरेगा की जगह नई योजना पर भी उठाए सवाल

गहलोत ने ग्रामीण रोजगार योजना में बदलाव को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि योजना में केंद्र की हिस्सेदारी घटाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है। उन्होंने राज्य सरकार से केंद्र के सामने यह मुद्दा उठाने और ग्रामीण रोजगार के लिए पर्याप्त धन सुनिश्चित करने की मांग की।

वीबी-जी राम जी योजना का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि योजना का नाम महात्मा गांधी से बदलकर भगवान राम के नाम पर करना मुद्दा नहीं है, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने के साथ लोगों को अधिक राहत भी मिलनी चाहिए।

गहलोत ने लंपी बीमारी के दौरान अपनी सरकार की ओर से पशुपालकों को दी गई सहायता और पशु शिविरों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार गायों के नाम पर समर्थन तो मांगती है, लेकिन पशुपालकों की परेशानियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही।

पंचायत परिसीमन पर बोले- कहीं 250 तो कहीं 20 हजार मतदाता

पंचायत राज चुनाव की तैयारियों के बीच गहलोत ने पंचायत क्षेत्रों के परिसीमन पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन मनमाने तरीके से किया गया है। उनके मुताबिक, कुछ वार्डों में 85 या 250 मतदाता हैं, जबकि कुछ में 5 हजार, 10 हजार और यहां तक कि 20 हजार मतदाता हैं।
गहलोत ने कहा कि निकाय चुनावों में जिस तरह गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, उसी तरह पंचायत राज संस्थाओं के परिसीमन में भी मनमाने फैसले किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण चुनावों में निष्पक्ष प्रक्रिया जरूरी है।

फलोदी से 45 साल पुराना नाता याद किया

गहलोत ने फलोदी से अपने करीब 45 साल पुराने जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि सांसद बनने के बाद पहली बार यहां आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद क्षेत्र की कई विकास परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई या काम रुक गया। उन्होंने सूखा प्रबंधन के अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए सरकार से जल्द राहत देने की अपील की।

भाजपा ने आरोपों को बताया निराधार

गहलोत के आरोपों पर भाजपा नेता अशरफ अली खिलजी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी हार से निराश कांग्रेस नेता बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। खिलजी के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं ने निकाय चुनाव से पहले जीत के दावे किए थे, लेकिन मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया।
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खिलजी ने कहा कि राज्य सरकार ने जिला कलेक्टर को सूखा राहत उपलब्ध कराने में बाधाएं दूर करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आगामी पंचायत राज चुनावों में भाजपा की जीत का भरोसा जताया और कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस नेताओं को फिर निराशा होगी।
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