सीएम अशोक गहलोत ने अब पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की मांगों पर एक्शन लेने के लिए संकेत देना शुरू कर दिया है। राजस्थान में परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक पर अंकुश लगाने के लिए कानून में अधिकतम सजा का प्रावधान उम्रकैद करने के लिए आगामी विधानसभा सत्र में बिल लाया जाएगा। सीएम अशोक गहलोत ने मंगलवार को ट्वीट कर यह बात कही है।
गहलोत ने कहा कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि आरपीएससी (राजस्थान लोक सेवा आयोग), डीओपी (कार्मिक विभाग), आरएसएसबी (राजस्थान राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड) और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा कर बेहतर प्रक्रिया तैयार करें। पेपर लीक के खिलाफ बनाए गए कानून में भी अधिकतम सजा का प्रावधान उम्रकैद करने के लिए आगामी विधानसभा सत्र में बिल लाने का फैसला किया है।
सचिन पायलट की एक मांग लेकर गहलोत ने दिया पॉजिटिव संकेत
सचिन पायलट ने तीन बड़ी मांगें गहलोत सरकार के सामने रखते हुए अल्टीमेटम दिया था। इनमें पेपर लीक से प्रभावित सभी अभ्यर्थियों को आर्थिक मुआवजा देने। आरपीएससी को भंग कर आमूलचूल परिवर्तन कर नए सिरे से चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्तियां करने। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के पिछले कार्यकाल में हुए कथित घोटाले और भ्रष्टाचार की जांच करने की मांग उठाई थी।
क्रेडिट सरकार के खाते में जाएगा
पिछले दिनों सीएम अशोक गहलोत ने अलग-अलग कर तीनों मांगों को खारिज कर दिया था, लेकिन पायलट ने भी कह दिया था वो भी पीछे नहीं हटेंगे। ऐसे में माना जा रहा है बीच का रास्ता निकालते हुए सीएम अशोक गहलोत ने पेपर लीक मामले में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान करने का बिल विधानसभा में लाने का फैसला कर अपने तरीके से सियासी मैसेज दिया है। अब इसका क्रेडिट भी सीधे-सीधे खुद अशोक गहलोत सरकार ही लेना चाहेगी, क्योंकि सचिन पायलट की मांग का इसमें कोई हवाला नहीं दिया गया है। न ही यह बताया गया है कि क्या सचिन पायलट इस निर्णय पर रजामंद हैं?