राजस्थान सरकार पर बीते एक साल में कर्ज का पहाड़ बेतहाशा बढ़ा है। 68 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजटीय कर्ज हो चुका है। इसके अलावा बोर्ड और कॉर्पोरेशन को गिरवी रखकर भी हजारों करोड़ बाजार से उठाए हैं। इसके बाद भी खजाना खाली ही है। हैरानी इस बात की है कि इतना पैसा आखिर गया कहां? पंचायतों से लेकर अस्पतालों में फ्री इलाज तक के लिए सरकारी योजनाएं ठप पड़ी है क्योंकि हजारों करोड़ रुपये का भुगतान ही नहीं हुआ है।
क्या मुख्य सचिव के आदेश इन पर लागू होंगे
मुख्य सचिव सुधांश पंत सरकारी तंत्र को दुरुस्त करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। शुक्रवार को ही उन्होंने कार्मिक विभाग को पत्र लिखा है जिसमें भ्रष्ट और नाकारा अफसर तथा कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के लिए विभागों को हर माह सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। वे सरकारी दफ्तरों का दौरा कर रहे हैं। समय पर नहीं आने वाले कर्मचारियों को सस्पेंड करने तक की कार्रवाई की जा रही है। बड़ा सवाल यह है कि सरकारी खजानों की ऐसी दुर्दशा करने वाले अफसरों पर वे क्या कार्रवाई करेंगे?