श्री गोविंद देव जी मंदिर में फव्वारे लगाए गए हैं।
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श्री गोविंददेवजी मंदिर में गुरुवार से जल यात्रा महोत्सव की शुरुआत हुई। इस धार्मिक महोत्सव में ठाकुरजी की जल यात्रा झांकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। दोपहर 12:30 बजे ठाकुरजी की जल यात्रा झांकी के दर्शन होते ही श्रद्धालुओं ने 'हरे कृष्णा', 'राधे राधे' के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
जल यात्रा महोत्सव के दौरान ठाकुरजी को रियासतकालीन चांदी की कमलनुमा होदी में विराजमान किया गया, जिसमें चांदी के 10 और तांबे-पीतल के 12 फव्वारे लगे हैं। ठाकुरजी को सफेद धोती, दुपट्टा और फूलों का मुकुट धारण कराया गया तथा फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। जल में केवड़ा और गुलाब जल मिलाया गया। इससे पूरे मंदिर परिसर में सुगंधित वातावरण बना रहा। दक्षिण भारत से मंगवाए गए चंदन का लेप ठाकुरजी को लगाया गया। ठाकुरजी और राधा रानीजी ने हाथों में सोने की पिचकारी थामे जल क्रीड़ा की, जिसे देख श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी और राधा रानीजी की जल क्रीड़ा का दर्शन किया और आनंद लिया। जल यात्रा महोत्सव में ठाकुरजी को ऋतु फल, पूड़ी और सिकरन का भोग लगाया गया। इस जल यात्रा महोत्सव के दौरान कुल 12 झांकियों के दर्शन होंगे, जिनकी तिथियां 22 जून तक निर्धारित की गई हैं। महोत्सव का यह आयोजन भक्ति और उल्लास का प्रतीक है, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और ठाकुरजी के जयकारे लगाए। यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रतीक है, जो श्रद्धालुओं को ठाकुरजी के दिव्य दर्शन और अनूठी झांकी के साथ आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।