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Jaipur: कलेक्टर पॉवरलेस, चुनावी एजेंडे पूरे करने में खर्च हुआ पांच हजार करोड़ का फंड, जानिए क्या है मामला

Fri, 08 Dec 2023 01:59 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

कांग्रेस की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा सहित कई अन्य कांग्रेसी विधायकों ने इस डीएमएफटी फंड के वितरण में तत्कालीन सरकार पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए थे।
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डीएमएफटी फंड पर पक्षपात के आरोप। - फोटो : social media
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विस्तार
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राजस्थान सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं। अब देश लोकसभा चुनावों की दहलीज पर भी खड़ा है। राजस्थान विधानसभा चुनावों में डीएमएफटी फंड भी बड़ा चुनावी मुद्दा बना था। कांग्रेस की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा सहित कई अन्य कांग्रेसी विधायकों ने इस फंड के वितरण में तत्कालीन सरकार पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए थे। मुख्यमंत्री तक शिकायत भी दर्ज करवाई गई। 

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ज्योति मिर्धा ने इसी मुद्दे का हवाला देकर कांग्रेस छोड़ी और बीजेपी का दामन थाम लिया था। नागौर सहित कई अन्य जिलों के कांग्रेस विधायकों ने फंड के वितरण और उपयोग को लेकर भारी आपत्ति जताई थी। आरोप यह भी लगाए गए कि वित्त विभाग के अफसरों ने फंड वितरण में जमकर मनमर्जी की।

तत्कालीन सरकार को खुश करने के लिए वित्त (मार्गोपाय) विभाग के अफसरों ने इसी डीएमएफटी फंड का पैसा चुनावी वादों और घोषणाओं को पूरा करने में नियम विरुद्ध जाकर खर्च दिया, जबकि डीएमएफटी एक्ट के मुताबिक इस फंड का इस्तेमाल खनिज प्रभावित क्षेत्रों और उनमें काम करने वाले श्रमिकों के कल्याण के लिए ही खर्च किया जा सकता है। फंड में करीब पांच हजार करोड़ से ज्यादा की राशि थी, जिससे नियम विरुद्ध जाकर सत्ता के समीकरण साधने के लिए खर्च किया गया।
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वित्त (मार्गोपाय) विभाग ने छीने कलेक्टर्स के अधिकार 
डीएमएफटी के नियमों में प्रावधन था कि राशि का बंटवारा कलेक्टरों के जरिए किया जाएगा, लेकिन वित्त (मार्गोपाय) विभाग ने एक आदेश जारी कर कलेक्टरों से अधिकार छीन लिए। इससे संबंधित पीड़ित वर्ग मिलने वाले फायदे से वंचित रह गया।

कैसे हुए तय प्रक्रिया पलटने के आदेश
पूर्व में इस फंड का उपयोग करने की प्रक्रिया यह थी कि संबंधित जिला कलेक्टर निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ती करने के लिए फंड उपयोग करने में स्वयं सक्षम थे, लेकिन वित्त (मार्गोपाय) विभाग ने एक आदेश जारी किया, जिसमें कलेक्टर्स को फंड का उपयोग करने पर तत्काल प्रभाव से रोक ला दी थी। इसके बाद डीएमएफटी फंड के वितरण का अधिकार विभाग के अधिकारियों ने अपने हाथ में ले लिया। 

अब सत्ता बदली, क्या सिस्टम भी बदलेगा
अब राजस्थान में बीजेपी सत्ता में आ चुकी है। ज्योति मिर्धा बीजेपी की विधायक प्रत्याशी रही हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा इस फंड में राशि वितरण में किए गए पक्षपात को मुद्दा बनाया था। ऐसे में देखने वाली बात यह है कि क्या नई सरकार फंड का दुरुपयोग करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करेगी और फिर पीड़ित वर्ग को न्याय दिलाएगी? 

ये है डीएमएफटी फंड
प्रदेश में खदानों की रॉयल्टी से बने डिस्ट्रक मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट(डीएमएफटी) से प्राप्त राशि को इसके एक्ट के मुताबिक खनिज प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिकों के स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य जरूरतों पर खर्च किया जा सकता है।

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