गुड्स एंड सर्विस टैक्स इंटेलिजेंस महानिदेशालय DGGI, जयपुर की जोनल यूनिट ने जयपुर और दिल्ली स्थित एक सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। ये 212 गैर-मौजूदा फर्मों का संचालन कर रहा था और उनके माध्यम से विभिन्न प्राप्तकर्ता इकाइयों को बिना किसी सामान या सेवाओं की आपूर्ति के 320 करोड़ रुपये का फर्जी और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) दिया गया।
मास्टरमाइंड शुभम जिंदल और उनके भाई तरुण जिंदल इन दोनों की उम्र 22 से 24 साल के बीच है। ये आरोपी जगतपुरा, जयपुर के रहने वाले हैं। इन फर्जी फर्मों के संचालन और प्रबंधन के लिए दिल्ली के तीन लोगों को इन्होंने काम पर रखा हुआ था। DGGI को जांच से संकेत मिले हैं कि नकली ITC पास करने के लिए ये सिंडिकेट विभिन्न प्रकार के दलालों का इस्तेमाल करता है। जैसे कुछ दलाल नकली फर्म बनाने में शामिल हैं, कुछ कैश और RTGS ट्रांसफर का मैनेजमेंट कर रहे हैं और अन्य दलाल ऐसी प्राप्तकर्ता फर्म प्रोवाइड कराते हैं, जिन्हें फर्जी फर्मों से फर्जी बिल की ज़रूरत होती है।
60 लाख रुपये वाले सिंडिकेट के बैंक खातों को किया कुर्क
DGGI ने इस कार्रवाई में करीब 60 लाख रुपये वाले उनके बैंक खातों को कुर्क किया है। इसके अलावा ITC बैलेंस, ITC खाता बही में पड़े 4.87 करोड़ को स्वैच्छिक रूप से उलट दिया गया है। शुभम जिंदल और उनके भाई तरुण जिंदल को 19 जून 2023 को गिरफ्तार किया गया और मजिस्ट्रेट आर्थिक अपराध न्यायालय, जयपुर के समक्ष पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
DGGI, जयपुर जोनल यूनिट ने बताया कि वह फर्जी ITC मामलों का पता लगाने में राजस्थान में सबसे आगे रही है। जैसा कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान हुआ था। 2022-23 में नकली ITC से जुड़े 142 मामले उजागर किए गए और 1327 करोड़ रुपये का मामला दर्ज किया गया, जिसमें नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस वित्तीय वर्ष 2023-24 में अब तक 4 फर्जी ITC मामलों में चार व्यक्तियों की गिरफ्तारी के साथ 484 करोड़ रुपये का मामला दर्ज किया गया है। यह यूनिट ऐसे मामलों और सिंडिकेटों को खोजने के लिए सभी रोकथाम के कदम उठाने के लिए डेडिकेटेड है, जो नकली बिल जारी कर भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं।