प्रदेश सरकार के गोवंश को लेकर दिया गए आदेश पर राजनीति शुरू हो गई है। सरकार के मंत्री जोराराम कुमावत ने एक आदेश जारी कर गोवंश को 'आवारा' कहने पर पाबंदी लगा दी। साथ ही निर्देश भी जारी किया कि अब उन्हें सरकारी दस्तावेजों में और सरकारी भाषा में निराश्रित या बेसहारा कहा जाएगा। इस आदेश की घोषणा के साथ थी प्रदेश में राजनीतिक टिप्पणियों को दौर शुरू हो गया।
टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया x पर पर लिखा कि भारतीय जनता पार्टी पर वह कहावत चरित्राथ होती है, जिसमें कहा जाता है 'मुंह में राम बगल में छुरी' यह एक तरफ गए के संरक्षण की बात करते हैं। वहीं, दूसरी तरफ दो तस्कर की जमानत रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में वकील तक नहीं भेज पाते। कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने गाय को लेकर भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उपचुनाव में गाय के नाम पर वोट बटोरने की बात कही।
दो बैल से गाय और बछड़ा तक की राजनीति
इसका जवाब देते हुए प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि यूं तो गाय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, पर जो कांग्रेस बार-बार गाय पर राजनीति करने की बात कहती है। मैं उससे पूछना चाहता हूं कि इनका चुनावी चिह्न शुरुआत में दो बैलों की जोड़ी हुआ करता था। फिर गौ तस्करों से सांठगांठ होने के बाद इसे बदलकर गाय बछड़ा कर दिया गया। इससे सवाल खड़ा होता है कि गाय पर राजनीति कौन कर रहा है। गोवंश पर राजनीति किसने की है। गाय बछड़े के नाम पर वोट किसने मांगें। गाय बछड़े के नाम पर हमारी भावनाओं से खिलवाड़ कर वोट लिया और जब गौस्कारों से उन्होंने हाथ मिला लिया तो इन्होंने गाय के बछड़े को छोड़कर पंजा अपना लिया।