नगर निगम चुनाव की मतगणना से पहले भाजपा ने अपने पार्षद प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। शनिवार को भाजपा शहर कार्यालय में प्रत्याशियों को बुलाया गया और इसके बाद उन्हें बसों के जरिए एक निर्धारित स्थान के लिए रवाना किया गया। प्रत्याशियों के मुताबिक, उन्हें 4 से 5 दिन साथ रहने के लिए कहा गया है।
पार्टी की ओर से प्रत्याशियों को 22 सितंबर तक का सामान साथ लाने के निर्देश दिए गए हैं। 14 सितंबर को मतगणना होनी है। इसके बाद 21 सितंबर को महापौर और 22 सितंबर को उप महापौर का चुनाव होगा। ऐसे में भाजपा ने नतीजों से पहले ही अपने संभावित विजयी पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
प्रशिक्षण शिविर के नाम पर जुटाए गए प्रत्याशी
भाजपा की ओर से पार्षद प्रत्याशियों को फोन कर प्रशिक्षण शिविर की जानकारी दी गई। सभी को दोपहर 12 बजे पार्टी मुख्यालय पहुंचने के लिए कहा गया था। इसके बाद बसों से उन्हें एक स्थान पर ले जाया गया।
भाजपा शहर जिला अध्यक्ष अमित गोयल ने इसे पार्टी के प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि सभी प्रत्याशी एक जगह परिवार की तरह रहेंगे और पार्टी की रीति-नीति के साथ सरकार की योजनाओं और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। हालांकि, 22 सितंबर तक प्रत्याशियों को साथ रखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी का जो आदेश होगा, उसका पालन किया जाएगा।
यह भी पढें-
जोधपुर: पांच लाख से अधिक मतदाताओं ने डाला वोट, 100 वार्डों का फैसला ईवीएम में कैद; 14 सितंबर को आएंगे नतीजे
काउंटिंग के बाद शुरू होगा असली बोर्ड का खेल
भाजपा की इस कवायद को सिर्फ प्रशिक्षण शिविर के तौर पर नहीं, बल्कि काउंटिंग के बाद बनने वाले बोर्डों के गणित से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कई नगर निकायों में मुकाबला करीबी माना जा रहा है। ऐसे में नतीजों के बाद बहुमत से कुछ सीटें दूर रहने की स्थिति में निर्दलीय या दूसरे दलों के पार्षदों की भूमिका अहम हो सकती है।
ऐसे समीकरण में भाजपा अपने संभावित विजयी पार्षदों को नतीजों के बाद विपक्षी दलों या अन्य राजनीतिक खेमों के संपर्क से दूर रखना चाहती है। खासकर महापौर और उप महापौर के चुनाव तक पार्षदों को एकजुट रखना पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
जयपुर के अलावा दूसरे जिलों में भी तैयारी
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ जयपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के दूसरे नगर निकायों में भी इसी तरह की रणनीति पर काम किया जा रहा है। उदयपुर समेत कई जिलों में प्रत्याशियों को प्रशिक्षण शिविर के नाम पर एकजुट रखने की तैयारी है।
इसका मकसद साफ तौर पर मतगणना से लेकर बोर्ड गठन तक पार्टी के संभावित विजयी प्रत्याशियों पर पकड़ बनाए रखना माना जा रहा है। अब 14 सितंबर को आने वाले नतीजे बताएंगे कि भाजपा की यह बाड़ेबंदी कितने निकायों में बहुमत के गणित को अपने पक्ष में बनाए रखने में कामयाब होती है।