Rajasthan: ज्ञापन में महाराणा सांगा के शौर्य और पराक्रम को रेखांकित करते हुए बताया गया कि उन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध वीरता पूर्वक संघर्ष किया। 1527 के खानवा के युद्ध सहित कई युद्धों में उनका नेतृत्व ऐतिहासिक माना जाता है।
समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन द्वारा वीर शिरोमणि महाराणा सांगा को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बयान को लेकर विभिन्न हिंदू संगठनों ने नाराजगी जताई है। बजरंग दल के प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए सांसद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि महाराणा सांगा देश के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक हैं और उनके प्रति अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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ज्ञापन में रखी गईं प्रमुख मांगें
1- सांसद रामजीलाल सुमन को उनके बयान के लिए संसद से निलंबित किया जाए।
2- उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाए।
3- भविष्य में इस तरह की टिप्पणियों पर रोक लगाने के लिए कड़े नियम बनाए जाएं।
महाराणा सांगा का ऐतिहासिक योगदान
ज्ञापन में महाराणा सांगा के शौर्य और पराक्रम को रेखांकित करते हुए बताया गया कि उन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध वीरता पूर्वक संघर्ष किया। 1527 के खानवा के युद्ध सहित कई युद्धों में उनका नेतृत्व ऐतिहासिक माना जाता है।
विरोध प्रदर्शनों की चेतावनी
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है। वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमितोष पारीक ने कहा, "सांसद को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और सरकार को उनकी संसद सदस्यता पर भी विचार करना चाहिए।" बजरंग दल के पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सांसद ने माफी नहीं मांगी तो देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
राजनीतिक माहौल गरमाया
इस विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया जा रहा है। हिंदू संगठनों का कहना है कि महाराणा सांगा जैसे महापुरुषों के सम्मान की रक्षा करना हर भारतीय का कर्तव्य है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या सांसद रामजीलाल सुमन इस विवादित बयान पर सफाई देते हैं या माफी मांगते हैं।