Anti-Conversion Bill: हो-हंगामें के बीच मंगलवार को राजस्थान विधानसभा में जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने वाला विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही बुधवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि स्पीकर से गतिरोध के चलते कांग्रेस ने इस विधेयक पर चर्चा में भाग नहीं लिया। सरकार की तरफ से गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने सदन में चर्चा के लिए विधेयक को प्रस्तावित किया था।
दिलावर बोले जबरन धर्म परिवर्तन पर चलेगा बुल्डोजर
सरकार के मंत्री दिलावर ने विधेयक को लेकर कहा कि सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में कई बार देखने में आते हैं। जो कोई इस तरह की काम करेगा और जबरन धर्म परिवर्तन के लिए जिस जगह का इस्तेमाल किया जाएगा उसके खिलाफ अब बुलडोजर भी चल सकेगा। दिलावर ने कहा, धर्म परिवर्तन देश को खतरा होता है आपने केरल को देखा होगा, आपने कश्मीर को देखा है, आपने पाकिस्तान को देखा है। जहां ज्यादा मुस्लिम हो गए वहां हिंदू की क्या स्थिति बनी। बांग्लादेश में क्या स्थिति बनी जहां देश को नुकसान हुआ है। धर्म परिवर्तन करते ही उसकी भाषा बदल जाती है। देश के प्रति श्रद्धा और सम्मान खत्म हो जाता है, लगाओ खत्म हो जाता है, षड्यंत्र रचने का प्रयास वह लोग करते हैं।
अब क्या करना होगा?
यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से भी धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे
90 दिन पहले कलेक्टर या एडीएम को
डिक्लेरेशन देना होगा। इसी प्रकार धर्म परिवर्तन करवाने वाले धर्माचार्य को भी
60 दिन पहले मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी। यह सूचना
सार्वजनिक रूप से नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जाएगी, और उस पर
2 माह तक आपत्तियाँ आमंत्रित की जाएंगी।
बिना प्रक्रिया धर्म परिवर्तन पर सख्त सजा
अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति और प्रक्रिया अपनाए धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे
7 से 10 साल तक की सजा और
3 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को 10 दिन के भीतर कलेक्टर के सामने पेश होकर
अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी।
संस्थाओं पर भी लगेगा शिकंजा
अगर कोई संस्था अवैध धर्म परिवर्तन में लिप्त पाई जाती है, तो उसका
रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा और उस पर
एक करोड़ रुपये तक जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि यह कानून
जनहित और सामाजिक समरसता के लिए आवश्यक है, जबकि विपक्ष इसे
व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बता रहा है। इस विधेयक पर विधानसभा में जोरदार बहस जारी है।
अब क्या करना होगा?
यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से भी धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे
90 दिन पहले कलेक्टर या एडीएम को
डिक्लेरेशन देना होगा। इसी प्रकार धर्म परिवर्तन करवाने वाले धर्माचार्य को भी
60 दिन पहले मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी। यह सूचना
सार्वजनिक रूप से नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जाएगी, और उस पर
2 माह तक आपत्तियाँ आमंत्रित की जाएंगी।
बिना प्रक्रिया धर्म परिवर्तन पर सख्त सजा
अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति और प्रक्रिया अपनाए धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे
7 से 10 साल तक की सजा और
3 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को 10 दिन के भीतर कलेक्टर के सामने पेश होकर
अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी।
संस्थाओं पर भी लगेगा शिकंजा
अगर कोई संस्था अवैध धर्म परिवर्तन में लिप्त पाई जाती है, तो उसका
रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा और उस पर
एक करोड़ रुपये तक जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि यह कानून
जनहित और सामाजिक समरसता के लिए आवश्यक है, जबकि विपक्ष इसे
व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बता रहा है। इस विधेयक पर विधानसभा में जोरदार बहस जारी है।