कोटा और बीकानेर में प्रसूताओं की मौत के मामलों के बाद अब जयपुर के चांदपोल स्थित जनाना अस्पताल की व्यवस्थाएं भी सवालों के घेरे में हैं। अस्पताल में उपचार, ब्लड उपलब्धता और मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। अस्पताल परिसर में एक प्रसूता के जमीन पर बैठने और परिजनों के निजी अस्पताल ले जाने के फैसले ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर नई बहस छेड़ दी है।
कोटा में पांच और बीकानेर में दो प्रसूताओं की मौत के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच राजधानी जयपुर के सबसे बड़े जनाना अस्पताल, चांदपोल की स्थिति भी चिंताजनक नजर आ रही है। अस्पताल में सामने आ रही अव्यवस्थाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समय रहते सुधार नहीं हुआ तो अगला नंबर जयपुर का हो सकता है।
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पार्किंग में जमीन पर बैठी मिली प्रसूता
अमर उजाला की टीम जब जनाना अस्पताल पहुंची तो वहां एक प्रसूता अस्पताल की पार्किंग में जमीन पर बैठी मिली। परिजनों का आरोप था कि प्रसूता की हालत गंभीर होने के बावजूद उसे पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि अस्पताल की ओर से एक गोली तक उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं प्रसूता को खून की आवश्यकता बताई गई, लेकिन परिजनों का आरोप है कि उन्हें ब्लड उपलब्ध कराने में भी सहयोग नहीं मिला।
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'जैसे-तैसे खर्च उठाएंगे, लेकिन मरने नहीं देंगे'
प्रसूता के परिजनों ने बताया कि हालत लगातार बिगड़ने के कारण उन्होंने मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर निजी अस्पताल में दिखाने का निर्णय लिया है। जब उनसे पूछा गया कि निजी अस्पताल का खर्च कैसे उठाएंगे, तो उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "कैसे भी व्यवस्था कर लेंगे, लेकिन इसे मरने नहीं देंगे।"
ब्लड के लिए भटकते रहे परिजन
अस्पताल परिसर में ब्लड की व्यवस्था को लेकर परेशान परिजनों की तस्वीरें भी सामने आईं। प्रसूता लीना के पति बलबीर ने बताया कि अस्पताल में समय पर ब्लड नहीं मिलने के कारण उन्हें कई जगह भटकना पड़ा। उन्होंने कहा कि गंभीर परिस्थितियों में परिवार को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्टाफ के व्यवहार पर भी उठे सवाल
एक अन्य परिजन दीपक ने अस्पताल स्टाफ पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया। उनका कहना है कि प्रसव पीड़ा से गुजर रही महिलाओं और उनके परिजनों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। मरीजों को जानकारी और सुविधाएं देने के बजाय कई बार उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग के लिए चेतावनी बनीं शिकायतें
कोटा, बीकानेर और जोधपुर में सामने आई घटनाओं के बाद जयपुर के जनाना अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवाल चिकित्सा विभाग के लिए गंभीर चेतावनी माने जा रहे हैं। परिजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो प्रसूताओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में चिकित्सा विभाग से तत्काल समीक्षा और सुधारात्मक कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।