अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह से जुड़े विवाद में हिंदू पक्षकारों ने राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में मुस्लिम पक्ष की याचिका के जवाब में अपना लिखित पक्ष दाखिल कर दिया है। मुस्लिम पक्ष ने अजमेर जिला अदालत में चल रही कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मामले में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई इसी सप्ताह होने की संभावना है, जबकि अजमेर जिला अदालत में 19 सितंबर को अगली सुनवाई निर्धारित है।
मुस्लिम पक्ष की याचिका पर हिंदू पक्ष की आपत्ति
मामले में पक्षकार महाराणा प्रताप सेना के संस्थापक अध्यक्ष राज्यवर्धन सिंह परमार और अन्य हिंदू पक्षकारों की ओर से हाईकोर्ट में जवाब पेश किया गया है। उनका आरोप है कि मामले की सुनवाई को लंबा खींचने के उद्देश्य से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। हिंदू पक्ष का तर्क है कि अजमेर जिला अदालत ने कुछ लोगों को मामले में पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दी है, इसलिए मुस्लिम पक्ष को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला अदालत में मामले की सुनवाई जल्द पूरी कर निर्णय देने की मांग की है।
ये भी पढ़ें: राजस्थान: राहुल गांधी पर दर्ज मुकदमे पर भड़के डोटासरा, बोले- हम FIR को कूड़ेदान में डाल रहे हैं
मंदिर होने का दावा
राज्यवर्धन सिंह परमार ने दावा किया कि अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों से यह साबित होगा कि वर्तमान दरगाह स्थल पर पहले भगवान शिव का मंदिर था और बाद में उसे बदलकर दरगाह का स्वरूप दिया गया। हालांकि यह हिंदू पक्ष की ओर से किया गया दावा है और मामले में अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
सुनवाई जल्द पूरी करने की मांग
परमार ने यह भी कहा कि इस्लाम में दरगाह पर पूजा-अर्चना की परंपरा नहीं है और इस संबंध में अदालत के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिला अदालत की कार्रवाई बिना अनावश्यक देरी के आगे बढ़नी चाहिए।
वहीं निर्वाणी अखाड़े के महंत और अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के क्षेत्रीय अध्यक्ष महंत विष्णु दास ने कहा कि अगली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट से मामले का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि अजमेर जिला अदालत में चल रही सुनवाई बिना किसी बाधा के जारी रहनी चाहिए। फिलहाल सभी पक्षों की नजर हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और अजमेर जिला अदालत में होने वाली अगली सुनवाई पर है।