राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के चुनाव खेल के मैदान से ज्यादा राजनीतिक खींचतान का केंद्र बन गए हैं। चुनावी मैदान में प्रदेश सरकार और सत्तारूढ़ दल के चार प्रभावशाली नेताओं के बेटों की आधिकारिक एंट्री से खेल गलियारों के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी सरगर्मी तेज हो गई है।
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर, भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवारी के बेटे आशीष तिवारी ने अपने नामांकन दाखिल कर दिए हैं। इन प्रमुख चेहरों के सामने आने से आरसीए की चुनावी जंग अत्यंत दिलचस्प स्थिति में पहुंच गई है।
नामांकन दाखिल करने के बाद धनंजय सिंह खींवसर ने स्पष्ट किया कि उन्हें सरकार अथवा संगठन की तरफ से कोई आधिकारिक सूचना या निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है, इसी कारण वे अपना नामांकन पत्र भरने के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी दूसरे पैनल के बारे में भी फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी समर्थित जिला क्रिकेट संघों के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार व संगठन से जो भी दिशा-निर्देश जारी होंगे, वे सभी सदस्य उसी के अनुसार आगे का रुख तय करेंगे।
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विभिन्न पदों के लिए प्रमुख दावेदारी
चुनाव में सबसे अधिक खींचतान शीर्ष पद यानी अध्यक्ष पद को लेकर देखने को मिल रही है। अध्यक्ष पद के लिए धनंजय सिंह खींवसर और डीडी कुमावत के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। उपाध्यक्ष पद के लिए शिक्षा मंत्री के बेटे पवन दिलावर के अलावा विधायक के बेटे मोहित यादव का नाम भी चर्चा में बना हुआ है। वहीं सचिव पद के लिए मोहित यादव और राज्यसभा सांसद के बेटे आशीष तिवारी ने अपनी दावेदारी पेश की है। कोषाध्यक्ष पद के लिए आशीष तिवारी का नाम सामने आया है, जबकि संयुक्त सचिव पद के लिए विनोद सहारण ने पर्चा भरा है। इसके अलावा कार्यकारी सदस्य के तौर पर अरिष्ट सिंघवी का नाम सामने आया है। हालांकि अलग-अलग गुटों और पैनलों की वास्तविक स्थिति अभी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाई है।
सरकार और संगठन के निर्देशों पर टिकी नजरें
नामांकन प्रक्रिया के साथ ही आरसीए के अंदरखाने में भावी चुनावी रणनीति को लेकर जबरदस्त हलचल शुरू हो गई है। भाजपा समर्थित जिला क्रिकेट संघों ने साफ संकेत दिए हैं कि उनकी अंतिम रणनीति सरकार और पार्टी संगठन के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों के आधार पर ही आकार लेगी। लंबे समय बाद हो रहे आरसीए चुनाव पहले ही विवादों और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर चर्चा में बने हुए थे। अब बड़े राजनीतिक घरानों से जुड़े चेहरों के चुनावी मैदान में उतरने और संगठन के निर्देशों को लेकर आए बयानों ने इस मुकाबले को और अधिक रोचक बना दिया है।
पहला दिन नामांकन पत्र जमा करने का रहा, जिसमें अध्यक्ष पद समेत अन्य पदों के लिए जिस प्रकार अलग-अलग दावेदारियां प्रस्तुत हुई हैं, उससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में आरसीए की चुनावी सरगर्मी और तेज होगी।