सैन्य सम्मान से हुआ अंतिम संस्कार
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मिजोरम की राजधानी आइजोल में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के उपनिरीक्षक सुधीर स्वामी की ड्यूटी के दौरान गोली लगने से मौत हो गई। 30 वर्षीय सुधीर स्वामी का पार्थिव शरीर शुक्रवार रात उनके पैतृक गांव मूंडियागढ़ (चारणवास) लाया गया। इसके बाद जवान को शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने जयपुर जिले के रेनवाल थाने के बाहर रातभर प्रदर्शन किया। शनिवार को प्रशासन द्वारा हलके बल प्रयोग के बाद 15 घंटे से चला आ रहा धरना समाप्त करवाया गया। इसके पश्चात सैन्य सम्मान के साथ जवान का अंतिम संस्कार किया गया।
राजभवन सुरक्षा में तैनाती के दौरान हुआ हादसा
मिजोरम के आइजोल स्थित गवर्नर हाउस की सुरक्षा में तैनात सब-इंस्पेक्टर सुधीर स्वामी के केबिन में 5 नवंबर की रात करीब 10 बजे अचानक गोली चलने की आवाज आई। मौके पर पहुंचे जवानों ने सुधीर स्वामी को केबिन में गंभीर हालत में पाया। शुरुआती रिपोर्ट में सर्विस राइफल से खुद को गोली मारने की आशंका जताई गई है। हालांकि मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस और सुरक्षा बल के स्तर पर आधिकारिक जांच प्रक्रिया जारी है। परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं की जा रही है।
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शहीद के दर्जे को लेकर 15 घंटे चला धरना
पार्थिव देह रेनवाल पहुंचते ही ग्रामीण आक्रोशित हो गए। परिजनों और जनप्रतिनिधियों ने रेनवाल थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने सुधीर स्वामी को शहीद का दर्जा देने और अनुकंपा नियुक्ति की मांग रखी। इस दौरान सात-सूत्री मांगों को लेकर जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा गया। रातभर चली वार्ता के दौरान उपखंड अधिकारी सर्वेश शर्मा और तहसीलदार गंगाबिशन गुर्जर ने स्पष्ट किया कि नियमानुसार परिस्थितियों के आधार पर शहीद का दर्जा और अनुकंपा नौकरी देना संभव नहीं है। हालांकि प्रशासन ने अन्य मांगों को राज्य व केंद्र सरकार तक भेजने का आश्वासन दिया।
बल प्रयोग के बाद सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार
वार्ता में सहमति न बनने पर शनिवार दोपहर करीब 1 बजे पुलिस ने बल प्रयोग कर धरनास्थल को खाली करवा दिया। इसके बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में पार्थिव शरीर को मूंडियागढ़ गांव ले जाया गया। वहां पूर्ण सैन्य सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सुधीर स्वामी को अंतिम विदाई दी गई।