दौसा पहुंचे संत रितेश्वर ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर की जो प्राण प्रतिष्ठा हो रही है उसके लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 दिन के उपवास रखते हुए चौकी पर सोने के साथ तमाम सनातनी धर्म निभा रहे हैं। ऐसा प्रधानमंत्री आपको कहां मिलेगा जो 145 करोड़ हिंदुस्तानियों का प्रतिनिधित्व करते हुए तमाम सनातनी वैदिक क्रियाकलाप राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए अपने मन को शुद्ध करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा के नाम से हिंदुस्तान की पहचान भी पूरे संसार में होनी चाहिए।
रितेश्वर महाराज ने आगे कहा कि जो लोग राम और राम भक्तों का विरोध कर रहे हैं वो लोग इस राष्ट्र के नहीं हैं। जब लोकतंत्र का महापर्व आएगा तो भारत की जनता उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा जवाब देगी।
रितेश्वर महाराज ने कहा कि यह देश साधु-संतों का नहीं बल्कि सभी का है। साधु संत भी साधु संत बनने से पहले किसी माता-पिता की संतान होते हैं, उसके बाद अपने माता-पिता से दिव्यज्ञान लेकर वह साधु सन्यासी बनते हैं। अयोध्या में होने वाली प्राण प्रतिष्ठा में अबकी बार राम 492 साल बाद आ रहे हैं।
देश में कृष्ण मंदिर भी बनना चाहिए
कृष्ण मंदिर पर बोलते हुए रितेश्वर महाराज ने कहा कि मुझे लगता है देश में कृष्ण मंदिर भी बनना चाहिए। जैसे वेटिंगन सिटी का नाम लेते ही क्रिश्चियन याद आते हैं, मक्का मदीना का नाम लेते ही इस्लाम याद आता है, वैसे ही अयोध्या मथुरा और काशी का नाम लेते ही हिंदुओं का पवित्र स्थल और भगवान की जन्म भूमि याद आ जाती है।
रामराज्य आ जाए
हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र बनाने के बात पर रितेश्वर महाराज ने कहा कि मैं चाहता हूं कि रामराज्य आ जाए, क्योंकि हिंदू तो रावण भी था, हिंदू कंस भी था, लेकिन मेरा मानना है कि राम राज्य आ जाए।
जो नहीं जा रहा उसकी अपनी मर्जी
कांग्रेसियों के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण ठुकराने पर पर रितेश्वर महाराज बोले कि जिनका 22 जनवरी का प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण वह लोग 22 जनवरी को, बाकी 23 के बाद पूरे विश्व के लिए अयोध्या का राम मंदिर खुला है, जो लोग निमंत्रण के बाद भी नहीं जाना चाहते उनकी अपनी स्वतंत्रता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि वह राम विरोधी हैं। इस बात को रितेश्वर महाराज ने एक उदाहरण के तौर पर भी समझाया। उन्होंने कहा कि मान को यदि तुम्हारे मोहल्ले में सत्यनारायण भगवान की कथा हो और तुम्हें निमंत्रण मिले और तुम वहां नहीं जाना चाहते हो तो इसका मतलब यह नहीं है कि तुम भगवान सत्यनारायण के विरोधी हो। इसका मतलब ये है कि तुम जिस घर में सत्यनारायण भगवान की कथा हो रही है वहां नहीं जाना चाहते।