सपने वो नहीं होते हैं, जो नींद में देखे जाते हैं। सपने वो होते हैं, जो आपको सोने नहीं देते हैं। यह प्रसिद्ध कथन भारत में 'मिसाइल मैन' डॉक्टर अब्दुल कलाम का है। मगर इस कथन को राजस्थान के बाड़मेर ने सच होते देखा है। सड़क के किनारे फुटपाथ पर चूड़ियां बेचकर घर चलाने वाले माता-पिता के होनहार बेटे ने अपनी मेहनत और जुनून के बल पर सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर के पद को हासिल किया है।
तीन दिन पहले 16 अगस्त को जारी हुए केंद्रीय कर्मचारी संगठन बोर्ड परीक्षा रिजल्ट में बाड़मेर जिले के छोटे से गांव आदर्श ढूंढा कवास के राहुल गवारियां का सब इंस्पेक्टर पद पर चयन हुआ है। राहुल के पिता जलाराम और माता कमला दोनों ही पहले गांव-गांव ढाणी जाकर चूड़ियां बेचने का काम करते थे और उसके बाद बाड़मेर शहर के तिलक बस स्टैंड में छोटी सी मनिहारी की दुकान शुरू की। माता कमला ने अस्पताल के सामने सड़क के किनारे फुटपाथ पर चूड़ियां बेचकर बेटे को पढ़ाया और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करवाई। राहुल ने कड़ी मेहनत का केंद्रीय कर्मचारी संगठन बोर्ड की परीक्षा पास की है।
गवारिया समाज से पहले सब इंस्पेक्टर बनने का खिताब
राहुल ने गवारिया समाज से पहले सब इंस्पेक्टर बनने का खिताब अपने नाम किया और अपना लक्ष्य हासिल कर अपने पिछड़े समाज में एक नया अनुकरणीय मिसाल पेश की है।
राहुल ने 12वीं में ही फैसला कर लिया था कि उन्हें भारतीय सेना या अर्द्ध सैनिक बल में जाना है और अब अपने बचपन के सपने को पूरा करने के बाद राहुल ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया और बताया कि उनके समाज में पढ़ाई को लेकर लोग जागरूक नहीं है। राहुल की माता कमला देवी अनपढ़ हैं, तो पिता भी महज आठवीं पास है। उस समाज में जहां लोग जीवन यापन करने के लिए कोई भी काम कर लेते हैं। ऐसे समाज में तानों की परवाह किए बिना राहुल के माता-पिता ने राहुल को पढ़ाया-लिखाया और हमेशा आगे बढ़ने और तरक्की के लिए प्रोत्साहित किया।
जोधपुर ग्रुप के NCC कैडेट्स में बेस्ट कैडेट्स का अवार्ड भी जीता था
बाड़मेर में कॉलेज शिक्षा के दौरान राहुल ने एनसीसी ज्वॉइन की और गणतंत्र दिवस कैंप 2019 में हिस्सा लेकर जोधपुर ग्रुप कैडेट्स में बेस्ट कैडेट्स का अवार्ड भी जीता था और केंद्रीय कर्मचारी संगठन बोर्ड की पांच स्तरीय परीक्षा को भी राहुल ने पहले ही प्रयास में पास कर लिया था। राहुल के पिता जालाराम के अनुसर बच्चों को पढ़ाने के लिए वह और उनकी पत्नी अलग-अलग जगह पर चूड़ियां और कपड़े बेचा करते हैं। राहुल की मां बाड़मेर में जिला अस्पताल के सामने फुटपाथ पर चूड़ियां बेचती हैं। वहीं, पास में ही तिलक बस स्टैंड में पिता भी चूड़ियां बेचने का काम करते हैं। इस काम में कमाई कम होती है, लेकिन फिर भी बच्चों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं रखी। इसी का नतीजा है कि आज बेटे की सफलता पर नाज है।
हमने बोझ उठाया और बेटे ने मेहनत की-कमला देवी
राहुल की मां ने कहा कि उन्होंने बोझ उठाया और उनके बेटे ने मेहनत की। समाज के तानों के बावजूद राहुल को उनके माता-पिता ने पढ़ाया। राहुल की मां कमला देवी कहती हैं कि बेटे की पढ़ाई को लेकर उन्होंने समाज के लोगों की कई तरह की बातें सुनीं, लेकिन अब जब उनका बेटा सब-इंस्पेक्टर बन गया है, तो उन्हें बेहद खुशी है।
परीक्षा में देशभर के सात लाख युवा शामिल हुए, अंतिम सूची में 4300 सलेक्ट हुए
बता दें कि पांच स्तरीय आयोजित हुई केंद्रीय कर्मचारी संगठन बोर्ड की परीक्षा में देश भर के सात लाख युवाओं ने भाग लिया था। इसमें से एक लाख युवा ही प्री क्लियर कर पाए। इनमें से 68 हजार युवाओं को फिजिकल के लिए बुलाया गया था। फिर मुख्य परीक्षा के लिए 15 हजार युवाओं को चयनित किया गया। इसके बाद दस्तावेज जांच के बाद 12 हजार लोगों को मेडिकल के लिए बुलाया गया। अंतिम सूची 4300 युवा चयनित हुए, उसमें राहुल का नाम भी शामिल था।
राहुल के घर बधाई देने वालों का तांता लग रहा
अब बाड़मेर से करीब 20 किमी दूर आदर्श ढूंढा गांव के रहने वाले परिवार में खुशियां ही खुशियां बिखरी हुई हैं। राहुल के घर बधाई देने वालों का तांता लग रहा है, तो माता-पिता के चेहरे पर एक अलग ही खुशी देखने को मिल रही है।