राजसमंद जिला मुख्यालय पर स्थित श्री मंशापूर्ण महागणपति जी मंदिर में गणेश चतुर्थी पर्व पर आज सुबह से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं। मंशापूर्ण महागणपति मंदिर में गणेश महोत्सव को लेकर उत्साह का माहौल है। पूरे मंदिर को आकर्षक फूलों से सजाया गया है। टेंट का आकर्षक पंडाल और दो स्वागत द्वारा बनाए गए हैं। मंदिर पर विद्युत सजावट दूर से ही आकर्षित लग रही है।
आज गणेश चतुर्थी महोत्सव के पहले दिन महागणपति को कमल के फूलों से शृंगारित किया गया। मंदिर के पुजारी पंडित गोपाल श्रोत्रिय के अनुसार गणेश चतुर्थी के अवसर पर सुबह के समय दूध, दही, घी, शहद, शरकरा और पंचामृत से स्नान कराया गया। उसके बाद गणेश अथर्वषीर्ष व गणेश सहस्त्रनाम स्तोत्र पाठ सहित वेदिक मंत्रोचार के साथ अभिषेक को पूरा कर आरती की गयी।
संध्या के समय कमल के फूलों से विशेष शृंगार कर महागणपति की महाआरती की जाएगी। लड्डू प्रसाद का भोग लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया जाएगा। गणेश चतुर्थी से पांच दिनों तक मंदिर में अलग-अलग फूलों से शृंगार कर झांकियां सजाई जाएंगी। मंदिर में दर्शन व्यवस्था कतारबद्ध तरीके से रहेगी।
एक ही पाषाण पर गणेश परिवार के साथ कई विशिष्टता के कारण विश्व में अद्वितीय है महागणपति की ये प्रतिमा
प्रथमपूज्य आराध्य देव भगवान गणेश जी का राजसमन्द जिला मुख्यालय पर श्री मंशापूर्ण महागणपति का प्राचीन मंदिर अपने आप में विशिष्ट और दुर्लभ है। मंदिर में विराजित भगवान गणेश की विशाल पाषाण की प्रतिमा भारत में दुर्लभ ही देखने को मिलती है।
जिला मुख्यालय पर नौचोकी मार्ग पर स्थित श्री मंशापूर्ण महागणति मंदिर में एक ही पाषाण की शिला पर चतुर्भुजधारी भगवान गणेशजी के साथ रिद्धि-सिद्ध, शुभ-लाभ, गले में सर्प स्वरूप यज्ञोपवित्र व मूषक की सवारी है। भगवान गणेश का दाहिना पांव आगे की ओर निकला हुआ है। जो सदैव भक्तों के कार्य सिद्धी व मनोकामना पूर्ण करने का संकेत हैं।
यही नहीं चतुर्भुज धारी वरहद हस्त से भक्तों को आशीर्वाद दे रहे हैं। दूसरे हाथ में लड्डू, तीसेर में फरसा व चौथे में अंकुश है। सभी विशेषताएं गणेश की प्रतिमा में मौजूद है। भगवान गणेश के इस मंदिर में भक्तों की मनोकामनाए हमेशा पूर्ण होती है यही कारण है कि यह मंदिर मंशापूर्ण गणपति के नाम से प्रसिद्ध है।