पन्ना का खेड़ा निवासी शिक्षक रामकिशन मीणा ने शनिवार को रिपोर्ट दी, जिसमें बताया कि दिनांक 16 जनवरी को सायं वह अपने घर पर जा रहा था। रास्ते में माठ का झुपड़ा पहुंचा तभी के मनोहर लाल पिता बालू माठ, श्रवण पिता बालू माठ ने उनको रोककर मेरे साथ मारपीट की। इस पर उसके परिवार वालों ने थाना-शकरगढ़ में फोन कर शिकायत दी। शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। तब तक सभी आरोपी वहां से फरार हो गए।
आरोप है कि पुलिसकर्मी आरोपियों को ढूंढने के बजाय रामकिशन को पकड़ने लग गए। पुलिसकर्मी विजय सिंह प्रार्थी को जबरदस्ती अपने साथ बिठाकर थाने पर ले जाने लगा। उसने कहा कि मेरे ही परिवार वालों ने आपको फोन कर मेरे साथ मारपीट की सूचना दी है। आप मुझे क्यों पकड़ रहे हैं। उसने आरोप लगाया कि पुलिस वाले नहीं माने और उसे जातिगत अपमानित करते हुए रास्ते पर मां-बहनों की गालियां दीं। उसे जबरन खींचकर थाना-शक्करगढ़ में लेकर आ गए।
पैसे मांगने का लगाया आरोप
रामकिशन का आरोप है कि बिना वजह थाने में लाने के बाद पूरी रात उसे बिना किसी प्रकरण के ही इंचार्ज कुलदीप सिंह के कहने पर विजय सिंह ने थाने में बंद रखा। दीवान विजय सिंह ने अभियोगी से कहा कि अगर तुझे घर जाना है तो इसके बदले मुझे 20 हजार रुपये दे। रात भर उसके के साथ में मारपीट की गई। रामकिशन ने बताया कि पुलिस की पिटाई से उसकी बाईं आंख में गहरी चोट आई। उसको आंख से कम दिखाई दे रहा है।
पुलिस ने कहा, नशे में था व्यक्ति, शांतिभंग में दर्ज किया मामला
थाना प्रभारी शक्करगढ़ कुलदीप सिंह गुर्जर ने बताया कि माठ का झुंपड़ा में हंगामे मारपीट की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। वहां रामकिशन मीणा मिला। वह शराब के नशे में धुत था। उससे आरोपियों के बारे में पूछने पर वह नाम भी नहीं बता पा रहा था। इस पर उसे रिपोर्ट दिलवाने के लिए थाने लाया गया। थाने आते ही उसने हंगामा शुरू कर दिया। रामकिशन को शांतिभंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर मेडिकल करवाया गया है। यदि उसके साथ मारपीट हुई है तो घटना के पांच दिन बाद भी उसने किसी के खिलाफ रिपोर्ट नहीं दी है। रुपये मांगने और हिरासत में मारपीट का आरोप गलत है।