राजस्थान में बिजली संकट गहराता जा रहा है। कमज़ोर मानसून के कारण बिजली की डिमांड बढ़ने और सप्लाई कम मिलने के कारण अब बिजली कंपनियों ने उद्योगों में बिजली की कटौती कर किसानों और आम जनता को पावर सप्लाई देने का फैसला किया है।
जयपुर में विद्युत भवन में बनाया वॉर रूम
बिजली के हालातों की मॉनिटरिंग और सुचारू सप्लाई के लिए जयपुर डिस्कॉम के एचडी आर.एन. कुमावत ने विद्युत भवन में वार रूम और कंट्रोल रूम बनाया है। जहां 24 घंटे मॉनिटरिंग के लिए इंजीनियरों की टीम तैनात की गई है। तीन टीमें राउंड द क्लॉक मॉनिटरिंग का काम कर रही हैं। सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (एसएमयू) पूरी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जोनल और सर्किल लेवल पर भी कंट्रोल रूम वर्क कर रहे हैं। लेकिन समस्या यह है कि जले हुए ट्रांसफार्मर अब तक नहीं बदले गए हैं। इससे भी गांव में फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। फसलें सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं। जैतपुर एईएएन अशोक मीणा का कहना है कि स्टोर से ट्रांसफार्मर नहीं मिल रहे, इसको लेकर एक्सईएन को अवगत करवा दिया गया है।
चार दिन से हड़ताल पर 3500 जेईएन
प्रदेश में पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के बैनर चले पांचों बिजली कंपनियों के कुल 5100 में से 3500 हजार जेईएन और टेक्निकल कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं। इससे ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में बिजली सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। 4 दिन से कार्य बहिष्कार के बावजूद बिजली कंपनी प्रबंधन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहा है, क्योंकि चुनावी साल है और मांगें भी जायज हैं। पहले भी समझौता हो चुका, लेकिन लागू नहीं हुआ। अब डिस्कॉम अधिकारियों ने 9, 18 और 27 साल की सेवा अवधि पर उनके प्रमोशन करने और पे स्केल बढ़ाने का मौखिक आश्वासन दिया है, लेकिन जेईएन आदेश लागू करने की तारीख पूछ रहे हैं, जोकि अधिकारी पता नहीं पा रहे हैं।