जैसलमेर में भी कभी हुआ करते थे डायनासोर। ये बात साबित की है वैज्ञानिकों के एक दल ने जो थईयात गांव में अध्ययन के लिए पहुंचा है। खोज में पता चला है कि 180 मिलियन साल पहले यहां डायनासोर बहुतायात में रहते थे।
राजस्थान विश्वविद्यालय के जिओलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डीके पांडे ने कुछ साल पहले एक डायनासोर की हड्डी भी तालाश की थी।
34 वैज्ञानिक जो कि डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड, रशिया, स्लोवाकिया और यूके से आए हुए हैं वो आजकल जैसलमेर में हैं। इस टीम में कुछ भारतीय वैज्ञानिक भी हैं।
वैज्ञानिक जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इन डायनासोर्स के विकास और विनाश के क्या कारण रहे। इन वैज्ञानिकों की ये कांग्रेस 15 जनवरी तक चलेगी। ये 10 जनवरी से शुरू हुई थी।
अपने सर्वे के दौरान इन वैज्ञानिकों को डायनासोर के फुटप्रिंट भी मिले हैं जिससे साबित हुआ है कि यहां करीब 180 मिलियन साल पहले डायनासोर रहा करते थे। माना जा रहा है कि उस वक्त यहां समुद्र रहा होगा।
वैज्ञानिकों के मुताबिक ये रेप्टाइल्स तीन से चार मीटर लंबे थे और तेज भाग सकते थे, इनमें भारतीय शेर जितनी ताकत रही होगी।
माना जाता है कि किसी वक्त हिमालय की जगह एक समुद्र था जिसे टेथिस सागर कहा जाता है। उस सागर का दक्षिणी हिस्सा वर्तमान के राजस्थान में था। ये वो काल था जब धरती पर जैव विकास की नई कहानी लिखी जा रही थी।
अब जैसलमेर में डायनासोर के फॉसिल्स मिलने के बाद यहां पर्यटन बढ़ सकता है। देखना ये होगा कि अब वैज्ञानिकों अपनी रिपोर्ट में और क्या नई जानकारियां देते हैं।