पानी की हर एक बूंद मायने रखती है…कहावत जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित भेंसेना गांव के ग्रामीणों के लिए 100 फीसदी सच साबित हो रही है। पिछले 50 साल से ग्रामीण पानी की बूंद बूंद के लिए भटक रहे हैं। करीब 100 फीट गहराई के खारे पानी के दो कुएं ग्रामीणों की प्यास बुझा रहे हैं।
धौलपुर जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित भेंसेना गांव के लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। गांव में करीब 100 फीट गहरे के दो कुएं हैंं। दोनों कुएं में सुबह-शाम लंबी-लंबी कतार लगी रहती हैं, जिसमें महिला, पुरुष और बच्चे शामिल रहते हैं। गांव के बाहर करीब 3 किलोमीटर दूर से पानी को भरकर लाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी के अभाव के कारण ग्रामीणों का जीवन नरक जैसा बन गया है। ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए गांव के दो कुएं नाकाफी हैं। दोनों ही कुओं का पानी खारा है, इसलिए वह पीने लायक नहीं होता। सुबह से शाम तक पानी के लिए ग्रामीणों को जद्दोजहद करना पड़ता है।
45 साल पहले हुई थी शादी, तब से परेशानी
गांव की रहने वाली पुष्पा देवी ने बताया कि 45 साल पहले उनकी शादी हुई थी। तब भी गांव में पानी की समस्या थी और आज भी समस्या जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों को कई बार शिकायत भी की, लेकिन कोई हमारी परेशानी सुलझाने का नाम नहीं ले रहा है। गांव की महिलाएं तीन किलोमीटर दूर कुएं से पानी लेकर आती हैं। कुएं का पानी काफी खारा रहता है, लेकिन मजबूरी में खारा पानी ही पीना पड़ता है। वहीं, गांव की दूसरी महिला सुखदेवी ने बताया कि हम पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। एक साल पहले कुएं से पानी खींचते हुए उनका बेटा कुएं में गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। कुएं में और भी लोगों की मौत हुई है।