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Dholpur Water Crisis: तीन किलोमीटर दूर से खारा पानी लाते हैं ग्रामीण, कुएं से पानी खींचते हुए कई लोगों की मौत

Tue, 25 Apr 2023 06:59 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धौलपुर

सार

पानी की हर एक बूंद मायने रखती है…कहावत जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित भेंसेना गांव के ग्रामीणों के लिए 100 फीसदी सच साबित हो रही है। पिछले 50 साल से ग्रामीण पानी की बूंद बूंद के लिए भटक रहे हैं। करीब 100 फीट गहराई के खारे पानी के दो कुएं ग्रामीणों की प्यास बुझा रहे हैं। 

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3 किलोमीटर दूर से पानी लाते हुए महिलाएं। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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धौलपुर जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित भेंसेना गांव के लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। गांव में करीब 100 फीट गहरे के दो कुएं हैंं। दोनों कुएं में सुबह-शाम लंबी-लंबी कतार लगी रहती हैं, जिसमें महिला, पुरुष और बच्चे शामिल रहते हैं। गांव के बाहर करीब 3 किलोमीटर दूर से पानी को भरकर लाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी के अभाव के कारण ग्रामीणों का जीवन नरक जैसा बन गया है। ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए गांव के दो कुएं नाकाफी हैं। दोनों ही कुओं का पानी खारा है, इसलिए वह पीने लायक नहीं होता। सुबह से शाम तक पानी के लिए ग्रामीणों को जद्दोजहद करना पड़ता है। 

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शादी के दौरान सबसे अधिक दिक्कत
ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी में समस्या अधिक बढ़ जाती है। गांव में अगर कोई उत्सव या शादी समारोह होता है तो पानी शहर से खरीदकर लाना पड़ता है। स्थानीय ग्राम पंचायत के सरपंच यादव सिंह ने बताया कि गांव के अंदर पानी का लेवल काफी नीचे है। दो कुओं से ही गांव के पानी की आपूर्ति की जाती है। पेयजल समस्या के बारे में कई बार प्रशासन और नेताओं से भी कई बार शिकायत की है, लेकिन परेशानी अब तक सुलझ नहीं पा रही है। गर्मी की शुरुआत में ही तापमान लगभग 42 डिग्री तक पहुंच चुका है। घरेलू कामों में भी पानी की कमी महसूस हो रही है।

45 साल पहले हुई थी शादी, तब से परेशानी
गांव की रहने वाली पुष्पा देवी ने बताया कि 45 साल पहले उनकी शादी हुई थी। तब भी गांव में पानी की समस्या थी और आज भी समस्या जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों को कई बार शिकायत भी की, लेकिन कोई हमारी परेशानी सुलझाने का नाम नहीं ले रहा है। गांव की महिलाएं तीन किलोमीटर दूर कुएं से पानी लेकर आती हैं। कुएं का पानी काफी खारा रहता है, लेकिन मजबूरी में खारा पानी ही पीना पड़ता है। वहीं, गांव की दूसरी महिला सुखदेवी ने बताया कि हम पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। एक साल पहले कुएं से पानी खींचते हुए उनका बेटा कुएं में गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। कुएं में और भी लोगों की मौत हुई है।

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ग्रामीणों का नेताओं पर आरोप, देते हैं झूठा आश्वासन
पुष्पा देवी ने बताया कि पेयजल समस्या के बारे में कई बार स्थानीय विधायक और सांसद से भी शिकायत की गई है। चुनाव में वे वोट मांगने आते हैं, उस दौरान उन्हें समस्या बताओ तो वह सिर्फ आश्वासन देते हैं। लेकिन चुनाव होने के बाद से ही वह समस्या के बारे में सोचते भी नहीं हैं। इस वजह से हम लोगों का प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं से भरोसा हट चुका है। हाल ही में ग्रामीणों ने सरपंच के साथ कलेक्टर अनिल कुमार अग्रवाल को भी शिकायत पत्र दिया था, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला है।

मवेशी पालन में हो रही सबसे बड़ी मुसीबत
ग्रामीणों का कहना है कि पानी के कारण हमारी आमदनी पर भी फर्क पड़ता है। हमारा मुख्य रोजगार मवेशी पालन है। मवेशियों से ही हमारा घर चलता है, लेकिन पानी के अभाव में मवेशी भी परेशान होते हैं। हम पानी के कारण उनका चारा भी नहीं बना पाते।

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