दौसा राजस्थान की बहुचर्चित लोकसभा सीट है, जहां कांग्रेस और भाजपा में सीधा मुकाबला होगा। दोनों ही पार्टियों ने प्रचार प्रसार में अपनी ताकत झोंक रखी है। दौसा ही वह लोकसभा सीट है, जहां बीजेपी के डॉक्टर किरोडी लाल मीणा और कांग्रेस के सचिन पायलट की प्रतिष्ठा की सीट भी बनी है। यह दौसा लोकसभा सीट पायलट परिवार के समय कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी और पायलट परिवार यहां सामान्य सीट पर चुनाव लड़ता था। उस दौरान राजेश पायलट यहां से सांसद थे। उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी रमा पायलट तथा उनके बाद 26 साल की उम्र में सांसद बने सचिन पायलट ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत दौसा लोकसभा से चुनाव जीतकर की थी।
लेकिन पिछले परिसीमन के दौरान यह ST के लिए रिजर्व हो गई और वर्षों से कांग्रेस इस सीट पर खाता भी नहीं खोल पाई और अब यह सीट भाजपा के गढ़ के रूप में पहचान बनाने लगी। यहां पिछले 2 बार से भाजपा ने कब्जा बरकरार रखा हुआ है, उससे पहले डॉक्टर किरोडी लाल मीणा यहां से सांसद रह चुके हैं। चुनावी साल 2014 में यहां रोचक मुकाबला हुआ था। जब यहां से दो सगे भाइयों ने चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने यहां से नमो नारायण मीणा को मैदान में उतारा जो तत्कालीन वित्त मंत्री थे और भाजपा ने हरीश चंद्र मीणा को चुनाव मैदान उतारा था, जिसमें भाजपा के हरीशचंद्र मीणा जीत दर्ज हुई।
जसकौर मीणा सांसद बनीं
इसी तरह 2019 की गणित को भी समझा जाए तो कांग्रेस ने मुरारीलाल मीणा की पत्नी सविता मीणा को चुनाव में उतारा और भाजपा ने जसकौर मीणा को पर को उनके सामने खड़ा किया, जिसमें जसकौर मीणा ने सविता मीणा को 78444 मतों से चुनाव हरा दिया और जसकौर मीणा सांसद बनीं।
इस बार 5 प्रत्याशी मैदान में
अब 2024 दौसा लोकसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। कहने को तो चुनावी मैदान में 5 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जहां भाजपा से कन्हैयालाल मीणा, कांग्रेस से मुरारी लाल मीणा, बसपा से सोनू कुमार धानका और निर्दलीय प्रत्याशी मोहन लाल मीणा और डॉ. रामस्वरूप मीणा चुनावी मैदान में डटे हैं।
मुरारी मीणा माहिर खिलाड़ी
उधर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार मुरारी लाल मीणा चार बार के विधायक होने के साथ वर्तमान में भी दौसा विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी के विधायक चुने गए हैं। मुरारी लाल मीणा को राजनीति का माहिर खिलाड़ी भी माना जाता है। वे तत्कालीन गहलोत सरकार में कृषि विपणन राज्य मंत्री रहे हैं और उन्हें सचिन पायलट का करीबी नेता भी कहा जाता है।
मीणा मतदाताओं का अच्छा खासा दखल
इधर, भाजपा प्रत्याशी कन्हैयालाल मीणा भी कम नहीं हैं। चार बार बस्सी विधानसभा से विधायकी के साथ मंत्री भी रह चुके हैं। कन्हैयालाल मीणा भाजपा की भैरोसिंह शेखावत सरकार में मंत्री रहे है। कन्हैया लाल मीणा की छवि भी राजनीति के क्षेत्र में साफ सुथरी मानी जाती है। दौसा लोकसभा सीट पर सीधी टक्कर भाजपा के कन्हैया लाल मीणा और कांग्रेस से प्रत्याशी मुरारी लाल मीणा में होगी और मुकाबला भी कड़ा होगा। क्योंकि यह सीट एसटी है और मीणा मतदाताओं का इस सीट पर अच्छा खासा दखल रहता है।
2019 में 62% की हुई थी वोटिंग
वर्ष 2019 में भाजपा सांसद जसकौर मीणा कुल 548733 मत मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सविता मीणा 470289 को मत मिले थे। हार का अंतर 78444 मतों से रहा है और वोट प्रतिशत 62% था।