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राजस्थान: दौसा में गांधी जयंती पर दिखी एकता की तस्वीर, चार धर्मगुरुओं ने दिया प्रेम और इंसानियत का संदेश

Fri, 02 Oct 2026 08:25 PM IST
दौसा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

सार

गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर दौसा में प्रभात फेरी, रामधुनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए बापू के सत्य-अहिंसा और शास्त्रीजी के ‘जय जवान जय किसान’ के संदेश को याद किया गया। कार्यक्रम में चार धर्मों के धर्मगुरु एक मंच पर साथ आए और प्रेम, सद्भाव व इंसानियत का संदेश दिया।
 
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दौसा में गांधी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शुक्रवार सुबह दौसा जागा तो हवाओं में ‘रघुपति राघव राजा राम’ की धुन थी। हाथों में तिरंगा, गले में सूत की माला और जुबां पर बापू के भजन। मौका था राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारत के लाल, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती का। जिला मुख्यालय स्थित गांधी सर्किल पर ऐसा नजारा था, मानो पूरा दौसा एक सूत्र में बंध गया हो।

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प्रभात फेरी में गूंजा सत्य-अहिंसा का संदेश
सुबह सात बजे ही पीजी कॉलेज से विद्यार्थियों की प्रभात फेरी निकली। स्कूली बच्चों ने खादी की टोपी पहनी, हाथों में ‘जय जवान जय किसान’ और ‘सत्य-अहिंसा’ की तख्तियां लीं और शहर की गलियों से होते हुए गांधी सर्किल पहुंचे। आगे-आगे बैंड, पीछे-पीछे रामधुनी। जो भी सुनता, ठहर जाता।

गांधी सर्किल पर श्रद्धांजलि, लोक कलाकारों ने बांधा समां
गांधी सर्किल पर मुख्य मंच सजा था। जिला कलक्टर डॉ. सौम्या झा, एसपी पीयूष दीक्षित और नगर परिषद सभापति रेखा गुर्जर ने बापू और शास्त्रीजी के चित्र पर दीप जलाया। सूत की माला पहनाई और प्रतिमा पर फूलों की बारिश की। तभी कला जत्थे के लोक कलाकारों ने माइक संभाला और गा उठे- ‘हर मजहब जिसको प्यारा, वो इंसान चाहिए...’। पूरा सर्किल तालियों से गूंज उठा।
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एक मंच, चार धर्म और एक ही संदेश
कार्यक्रम की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब बनी, जब एक ही मंच पर पंडित, मौलवी, ग्रंथी और पादरी साथ खड़े हुए। सभी ने एक स्वर में कहा- नफरत नहीं, प्रेम चाहिए। धर्मगुरुओं ने कहा कि गांधी का धर्म इंसानियत था। प्राणी मात्र पर दया और एक-दूसरे का सम्मान ही सच्ची श्रद्धांजलि है। मुस्लिम धर्मगुरु ने कहा कि ‘राम है तू, रहीम है...’ की पंक्ति आज के दौर में और भी जरूरी है। वहीं सिख ग्रंथी ने कहा कि शास्त्रीजी का ‘जय जवान जय किसान’ सिर्फ नारा नहीं, बल्कि देश की आत्मा है।

कलेक्टर ने सुनाया बापू का ‘आखिरी आदमी’ वाला मंत्र
जिला कलक्टर डॉ. सौम्या झा ने भाषण नहीं, एक कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि बापू कहते थे, जब भी कोई फैसला लो तो आंखें बंद करो और उस सबसे गरीब, सबसे लाचार इंसान का चेहरा याद करो, जिसे तुमने देखा हो। फिर सोचो कि तुम्हारा फैसला उसके कितने काम आएगा। अगर जवाब हां है तो समझो फैसला सही है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि फाइलों में नहीं, जमीन पर उतरकर गरीब का भला देखो। यही गांधी जयंती की सच्ची पूजा होगी। एसपी पीयूष दीक्षित ने भी कहा कि गांधी का सत्य और शास्त्री की सादगी आज की पुलिस के लिए भी उतनी ही जरूरी है।

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