96 साल की वृद्धा सीढ़ियां नहीं चढ़ सकीं तो खुद नीचे आए जिला जज
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कहते हैं न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी बंधी होती है, लेकिन उसका दिल धड़कता है। ऐसा ही संवेदनशील उदाहरण दौसा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश केशव कौशिक ने पेश किया। जब 96 वर्षीय एक वृद्धा न्यायालय की सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ थीं, तो जिला जज स्वयं नीचे उतरकर कार में बैठी वृद्धा के पास पहुंचे और उन्हें अवार्ड राशि का चेक सौंपा।
यह नजारा दौसा जिला न्यायालय का है। न्यायालय परिसर में एक कार खड़ी थी, जिसमें 96 वर्षीय संपत्ति देवी शर्मा बैठी थीं। उम्र अधिक होने के कारण वह सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ थीं। उन्हें न्यायालय से मिलने वाली क्लेम राशि लेने के लिए परिवार के लोग कार से लेकर पहुंचे थे, लेकिन पहली मंजिल पर स्थित कोर्ट तक उन्हें ले जाना मुश्किल था।
जैसे ही यह बात जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष केशव कौशिक तक पहुंची, उन्होंने स्वयं नीचे जाकर वृद्धा को चेक देने का निर्णय लिया। वह अपने चैंबर से बाहर निकले और पहली मंजिल से नीचे उतरकर सीधे कार के पास पहुंचे।
8.21 लाख रुपये का चेक
पूरा मामला मोटर दुर्घटना क्लेम से जुड़ा है। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एस.बी.सी.एम.ए. संख्या 292/2016, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी बनाम ममता व अन्य तथा एस.बी.सी.एम.ए. संख्या 2823/2016 में 6 मई 2026 को अवार्ड पारित किया था। आदेश की पालना में द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने ब्याज सहित कुल 8 लाख 21 हजार 67 रुपये की राशि अधिकरण में जमा कराई थी।
जिला जज केशव कौशिक ने यह राशि प्रार्थीगण के खातों में जमा करने के आदेश दिए। इनमें एक प्रार्थी 96 वर्षीय संपत्ति देवी शर्मा पत्नी स्वर्गीय राधेश्याम शर्मा भी थीं। जिला जज जब नीचे पहुंचे तो उन्होंने कार में बैठी वृद्धा से ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराईं और फॉर्म पर उनका अंगूठा लगवाया। इसके बाद उन्होंने अपने हाथों से उन्हें चेक सौंपा।
चेक मिलने पर वृद्धा ने जिला जज को आशीर्वाद दिया। इस दौरान वहां मौजूद लोग भी भावुक नजर आए।
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पहले भी कर चुके हैं ऐसा
इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संतोष अग्रवाल, अधिवक्ता रामकरण वर्मा, महेश कंकराला और कोर्ट स्टाफ मौजूद रहा। सचिव संतोष अग्रवाल ने बताया कि यह पहली बार नहीं है। जिला जज पहले भी दिव्यांग, बीमार और बुजुर्ग लोगों की सुविधा के लिए स्वयं नीचे आकर चेक दे चुके हैं।
उनका मानना है कि न्यायालय लोगों के लिए है और लोगों को न्यायालय तक पहुंचने में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
चेक देते हुए जिला जज - फोटो : credit