दौसा के सदर थाने में तैनात राजस्थान पुलिस का जवान प्रहलाद सिंह 23 अगस्त के दिन बदमाशों का पीछा करते हुए सिर में चोट लगने के कारण घायल हुआ था। उसके बाद प्रहलाद को जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल भर्ती करवाया गया, जहां इलाज के दौरान प्रहलाद ने दम तोड़ दिया था।
बदमाशों से मुठभेड़ में शहीद हुए प्रहलाद सिंह के परिजनों को कहना है कि आज तक भी प्रहलाद सिंह को शहीद का दर्जा नहीं दिया गया है। एमआई श्रेणी का आवास, अनुकंपा नियुक्ति सहित मुख्यमंत्री ने एक करोड़ का मुआवजा देने की घोषणा भी की थी। लेकिन वह भी अब तक नहीं मिलने के चलते आज दौसा के सर्वसमाज के युवा व बुजुर्गों ने सोमनाथ चौराहे से पैदल कूच कर कलेक्ट्रेट पर शहीद प्रहलाद सिंह को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन किया।
जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रहलाद सिंह को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने सहित अन्य घोषणा की थी। उसके बावजूद भी अभी तक भी प्रहलाद सिंह के परिवार को न तो उस समय हुई घोषणाओं में से कुछ मिल पाया और न ही शहीद का दर्जा प्रहलाद सिंह को मिला। इसके चलते अब प्रहलाद सिंह के परिजन आर्थिक तंगी का शिकार भी हो रहे हैं। साथ ही मुआवजा नहीं मिलने से परिजनों को दर-दर भटकना पड़ रहा है।
इसी को लेकर परिजनों के द्वारा दौसा के सोमनाथ सर्कल से लेकर जिला कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला और कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। साथ ही जिला कलेक्टर कमर चौधरी को जल्द मुआवजा दिलाने की मांग का ज्ञापन सौंपा। परिजनों ने एसपी वंदिता राणा से भी मुलाकात की और जल्द आर्थिक लाभ दिलाने की मांग की है। इस मौके पर बड़ी संख्या में युवा एवं शहीद के परिजन मौजूद रहे।
क्या था मामला
23 अगस्त 2023 को दौसा डीएसटी के कांस्टेबल प्रहलाद सिंह को सूचना मिली थी कि दो बदमाश जयपुर से बाइक चुराकर एनएच-21 से होकर जा रहे हैं और संभवतया उनके पास अवैध हथियार भी हैं। सूचना पर कांस्टेबल प्रहलाद सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों आरोपियों का पीछा किया तो पुलिस को आता देख आरोपी बाइक छोड़कर खेतों में भाग गए, जिसके बाद कांस्टेबल प्रहलाद सिंह ने खेतों में भी आरोपियों का पीछा किया। इसी दौरान खेतों में आगे तारबंदी होने व स्वयं को चारों ओर से घिरा हुआ देखकर आरोपी नवीन सिनसिनवार ने कांस्टेबल प्रहलाद सिंह पर फायरिंग कर दी थी। अब राजस्थान पुलिस के परिजन न्याय के लिए डर-डर की ठोकरे खा रहे हैं। लेकिन राजस्थान पुलिस अपने इस जवान को न्याय नहीं दे पा रही है। ऐसे में फिर प्रहलाद सिंह के परिवार को राजस्थान पुलिस के जवान होने का दर्द मजबूरन सहन करना पड़ रहा है।