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Dausa: प्रशासन गांवों के संग अभियान कैंप में नशे में धुत होकर पहुंचा पटवारी, झूमता हुआ महिलाओं के पास पहुंचा

Thu, 22 Jun 2023 07:40 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

सार

दौसा के बांदीकुई में प्रशासन गांव के संग और महंगाई राहत कैंप में एक तो अधिकारी समय पर नहीं पहुंच रहे हैं, दूसरा कुछ ज़िम्मेदार नशा भी करके आ रहे हैं। ऐसा ही एक पटवारी शराब के नशे में झूमते-झूमते कैंप में पहुंचा। इतना ही नहीं वह पटवारी महिला कार्मिकों के पास पहुंच गया। इस दौरान खाकी वर्दी में कुछ जवान भी वहां मौजूद रहे।
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नशे में धुत होकर पहुंचा पटवारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कैंप में तैनात कर्मचारी, पुलिसकर्मी और फरियादी लोग शराब के नशे में धुत्त पटवारी को देखते रह गए। ऐसी हालत में खुद कर्मचारी ही उसे संदेह की नजर से देखते रहे कि कहीं वह कोई गलत हरकत न कर बैठे। दौसा जिले के बांदीकुई में सरकार की मंशा पर अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। प्रशासन गांव के संग अभियान शिविर और महंगाई राहत कैंप में अधिकारी समय पर नहीं पहुंच रहे। कैंप के साथ फील्ड विजिट के नाम पर इधर-उधर चले जाते हैं और फरियादी घंटों बैठे रहते हैं।

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बता दें कि ये पूरा मामला बसवा उपखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत पाडला का है। जहां गुरुवार को राहत शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें एक पटवारी नशे में धुत होकर काम करने पहुंचा, जिसके चलते आमजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

लोगों ने की शिकायत...
लोगों ने नशे में धुत पटवारी की शिकायत की, तो बसवा उपखंड अधिकारी नवनीत कुमार पटवारी को बचाते हुए नजर आए। वहीं, ग्रामीणों की शिकायत पर पहुंची मीडिया टीम ने उपखंड अधिकारी से सवाल किए। उपखंड अधिकारी की मौजूदगी में चल रहे राहत शिविर में नशे में धुत ऑन ड्यूटी पटवारी की उपस्थिति पर उपखंड अधिकारी ने कहा, मामले को दिखवा लिया जाएगा।
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कैंप में दोपहर 12 बजे तक तहसीलदार के नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में नाराजगी...
इधर, कैंप में 12 बजे तक तहसीलदार के नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में नाराजगी दिखी। इस दौरान नायब तहसीलदार भी लोगों को नजर नहीं आए। ऐसे में ग्रामीणों ने कहा कि शिविर में अधिकतर-कर्मचारी देरी से पहुंचते हैं। मौके पर ही कैंप में मेडिकल टीम मौजूद होने के बावजूद भी नशे में धुत पटवारी का मेडिकल नहीं कराया गया। क्योंकि अधिकारियों और कर्मचारियों को डर था कि इससे भद्द पटेगी और किरकिरी होगी। अपने साथी पटवारी को बचाने के लिए बाद में हंगामा होने पर उसे किसी बहाने से इधर-उधर कर दिया गया।

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