उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड में पीएफआई की भूमिका सामने आने के सुराग एनआईए के हाथ लगे हैं। सूत्रो के मुताबिक एनआईए ने पीएफआई की पॉलिटिकल विंग एसडीपीआई के उदयपुर के जिला अध्यक्ष मोहम्मद सोहेल को गिरफ्तार किया है। सोहेल कन्हैयालाल हत्याकांड के मुख्य आरोपी गौस मोहम्मद के सम्पर्क में था। कन्हैयालाल हत्या से पहले उदयपुर में एक प्रदर्शन हुआ था। जिसमें सर तन से जुदा के नारे लगे थे और कन्हैयालाल की हत्या की साजिश रची गई थी, उसमें सोहेल भी शामिल था।
मुस्लिम युवाओं को हिंसक और गैर कानूनी गतिविधियों के लिए कट्टरपंथी बनाने की साजिश रची
पीएफआई कार्यकर्ता कैडरों के खिलाफ अभियान छेड़ते हुए एनआईए ने 10 फरवरी को राजस्थान के उदयपुर से आरोपी मोहम्मद सोहेल को गिरफ्तार किया है। उसे सुबह जल्द एनआईए गिरफ्त में ले लिया था। साम्प्रदायिक नफरत फैलाने और पीएफआई की आपराधिक साजिश में उसकी सक्रिय भूमिका सामने आई है। सूत्र बताते हैं कि उदयपुर निवासी सोलेह ने पीएफआई कैडरों और सदस्यों के साथ मिलकर मुस्लिम युवाओं को हिंसक और गैरकानूनी गतिविधियों के लिए कट्टरपंथी बनाने की साजिश रची थी। सोलेह को एसडीपीआई उदयपुर का जिलाध्यक्ष बताया जा रहा है। इससे पहले एनआईए ने मामले में सादिक सर्राफ और मोहम्मद आसिफ को गिरफ्तार किया था। मामला शुरू में 19 सितम्बर 2022 को एनआईए मुख्यालय नई दिल्ली में दर्ज किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद अब मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 3 हो गई है।
साम्प्रदायिक नफरत, हिंसक और गैरकानूनी कार्य की साजिश में शामिल
एनआईए ने शनिवार को कहा-मोहम्मद सोहेल के रूप में पहचाने गए संदिग्ध को शुक्रवार को उसने राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर चलाए गए एक तलाशी अभियान के दौरान गिरफ्तार किया । वह हिंसक और गैरकानूनी कार्य करने की साजिश में शामिल हैं, पूछताछ में कुछ और और खुलासे होने का संभावना है। आतंकवाद रोधी एजेंसी ने कहा कि सोहेल पर शांति भंग करने और सांप्रदायिक नफरत और दुश्मनी फैलाने की पीएफआई की आपराधिक साजिश में सक्रिय रूप से शामिल होने का आरोप है। वह उदयपुर में मुर्शिद नगर का निवासी है।
पीएफआई पर गृह मंत्रालय ने पिछले साल लगाया था बैन
गृह मंत्रालय ने सितंबर 2022 के अंत में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत पीएफआई, उसके सहयोगी संगठनों को गैरकानूनी संघ घोषित करके 5 साल की अवधि के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। पीएफआई के कार्यकर्ताओं पर कई आतंकवादी कृत्यों और संजीत (केरल, 2021), वी-रामलिंगम (तमिलनाडु, 2019), नंदू (केरल, 2021), अभिमन्यु (केरल, 2018) सहित कई व्यक्तियों की हत्या में शामिल होने का भी आरोप है। बीबिन (केरल, 2017), शरथ (कामटक, 2017), आर रुद्रेश (कामटक, 2016), प्रवीण पुयारी (कर्नाटक, 2016), और शशि कुमार (तमिलनाडु, 2016)। पीएफआई के सदस्यों ने पिछले साल 26 जुलाई 2022 को कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के सुलिया तालुक के बेल्लारे गांव में भाजपा के युवा मोर्चा जिला समिति के सदस्य प्रवीण नेतारू की हत्या कर दी थी।