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Covid-19: राजस्थान में रैपिड जांच किट का इस्तेमाल बंद , 5.4 फीसदी ही मिल रही थी सही रिपोर्ट

Wed, 22 Apr 2020 11:18 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला नेटवर्क, जयपुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
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राजस्थान ने रैपिड जांच के लिए दिए गए किट का उपयोग आईसीएमआर के निर्देशों से पहले ही रोक दिया था। वजह थी परिणाम केवल 5.4 प्रतिशत ही सही मिल रहे थे, जबकि इन्हें 90 प्रतिशत सही मिलने का दावा किया गया था। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के अनुसार इन किट का कोई फायदा नहीं हो रहा था।

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जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी व मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष के नेतृत्व में बनी समिति ने 168 जांच के आधार पर इन किट की सटीकता का आकलन किया था। कई ऐसे मरीजों की जांच की गई, जिन्हें पीसीआर जांच में पॉजिटिव पाया गया, रैपिड जांच किट ने इन्हें भी नेगेटिव रिपोर्ट दी।

पुष्टि के लिए नहीं हैं, इसलिए विफल हो रहे

आईसीएमआर ने पूर्व में ही घोषित कर दिया था कि कोविड-19 की पुष्टि के लिए रैपिड जांच किट नहीं हैं। यह संक्रमण की पुष्टि के लिए हरगिज नहीं हैं। इनका उपयोग केवल संक्रमण वाले हॉटस्पॉट्स की निगरानी और क्लस्टर जांच में होना चाहिए। इसके मायने हैं कि संक्रमित मिले लोगों के क्षेत्रों में इन किट से तुरंत निगरानी के लिए जांच करवाई जा सकती है। इनका उपयोग केवल सरकार करे और हॉटस्पॉट में संक्रमितों के इर्द-गिर्द रहने वालाें में संक्रमण का पता लगाने के लिए होना चाहिए।

एंटीबॉडीज और टाइमिंग

संक्रमण के बाद पहले सात दिनों में शरीर में खास किस्म की इम्यूनोग्लोबिन-जी एंटीबॉडीज बनती हैं। कई बार इनकी वजह से संक्रमण पकड़ में नहीं आ पाता और रैपिड टेस्ट की जांच विफल हो जाती है। वहीं चौदहवें दिन से शरीर में एंटी इम्यूनोग्लोबिन डी एंटीबॉडीज बनने लगती हैं, इनके जरिए संक्रमण की पहचान के लिए यह टेस्ट किए जा सकते हैं। जांच के दौरान इन दोनों समय का ध्यान रखना जरूरी है।

फॉल्स निगेटिव और पॉजिटिव की उलझन

कई बार एंटीबॉडी से टेस्ट के दौरान इनमें एक-दूसरे से प्रतिक्रिया करने की आशंका होती है। इस वजह से फॉल्स निगेटिव (संक्रमण होने पर भी संक्रमण न मिलना) और फॉल्स पॉजिटिव (संक्रमण न होने पर संक्रमण मिलना) की स्थिति बन जाती है। यह किट चीन में बनी हैं। जानकारों के अनुसार इनकी गुणवत्ता ठीक नहीं है। स्पेन ने तो गड़बड़ियां मिलने के बाद इन्हें लौटा ही दिया था।

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