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Congress Chintan Shivir: राहुल को अध्यक्ष बनाने की मांग, गहलोत में दिखा आत्मविश्वास, जानें शिविर की दो अहम बातें 

Sat, 14 May 2022 09:55 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर

सार

चिंतन शिविर में राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की मांग ने भी जोर पकड़ा। पार्टी के कई नेता उनके समर्थन में खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, लेकिन शिविर में कुछ आवाजें ऐसी भी थीं जो उनके विरोध में थीं। कहा गया कि राहुल गांधी से मिलने के लिए मुख्यमंत्रियों को भी लंबा इंतजार करना पड़ता है।
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राहुल गांधी और अशोक गहलोत। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजस्थान के उदयपुर में चल रहे कांग्रेस के चिंतन शिविर को दो दिन पूरे हो गए। इन दो दिनों में कई अहम बातें निकल कर सामने आईं है, लेकिन हम यहां दो की बात कर रहे हैं। एक राहुल गांधी को दोबारा से कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाए। वहीं दूसरी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जुड़ी है। शनिवार को उनका आत्मविश्वास देखकर लग रहा था कि मानों उन्होंने कोई जंग जीत ली हो।   

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कांग्रेस में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आगे लाने को लेकर चिंतन शिविर में चर्चा हुई। ऐसे युवा नेताओं को आगे लाने की बात कही गई जो देश को समझ सके और कांग्रेस का पक्ष भी लोगों को समझा सके। जानकार सूत्र ने बताया कि इसके कई कारण है, लेकिन प्रमुख कारण है राहुल गांधी।

दरअसल, पार्टी राहुल गांधी को युवा नेता के रूप में देश के सामने पेश कर रही है। अगर, राहुल पार्टी की कमान संभालते हैं तो उन्हें एक युवा टीम भी चाहिए, लेकिन शिविर में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। युवा नेता बुलाए तो गए, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने के लिए मंच नहीं दिया गया। 
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शिविर में राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की मांग ने भी जोर पकड़ा। पार्टी के कई नेता उनके समर्थन में खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, लेकिन शिविर में कुछ आवाजें ऐसी भी थीं जो उनके विरोध में थीं। कहा गया कि राहुल गांधी से मिलने के लिए मुख्यमंत्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। पार्टी कार्यकर्ताओं से तो वह कभी मिलते ही नहीं हैं। इस कारण कांग्रेस और राहुल गांधी के बीच एक गहरी खाई है, जिसे पाटना होगा। 

आसान भाषा में कहा जाए तो राहुल गांधी को भी एक 'अहमद पटेल' की आवश्यकता है। पटेल का सोनिया गांधी और पार्टी के बीच समन्वय बनाने में अहम रोल था। ऐसे में राहुल को भी किसी ऐसे ही व्यक्ति की आवश्यकता है, जो उनके और पार्टी के बीच की दूरी को कम कर सके। कल रविवार को आखिरी दिन सीडब्ल्यूसी की बैठक में चिंतिन शिविर में आए सभी प्रस्तावों पर चर्चा के बाद मुहर लगाई जा सकती है। साथ ही राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव भी लगाया जा सकता है।

चिंतन शिविर की दूसरी बात जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है सोनिया गांधी की मार्मिक अपील। जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी ने सबको बहुत कुछ दिया है। अब पार्टी को देने की बारी है। यह बात सोनिया ने दो बार कही। सूत्रों का कहना है इसके बाद भी किसी नेता ने इस तरह की कोई पहल नहीं की है। यही कारण है कि शिविर के नाम से चिंतन हटा कर नव संकल्प की बात की जा रही है। 

कांग्रेस नेता सब कुछ ठीक होने की बात कर रहे हैं, लेकिन यह कितना ठीक है यह कोई नहीं बता सकता। इस शिविर से कांग्रेस को क्या मिलेगा यह भी कोई नहीं बता सकता सिवाय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के। यह शिविर उनके लिए काफी लाभदायक माना जा रहा है। शनिवार को उनमें कमाल का आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था।

उनके चेहरे से ऐसा लग रहा था कि मानो कोई जंग जीत ली हो। कहा जा रहा है कि गहलोत ने पिछले तीन साल से अपने सिर पर लटकी उस तलवार को हटा दिया है। उनमें वही आत्मविश्वास नजर आया जो कुछ समय पहले सरकार बचाने के बाद था। माना जा रहा है कि अब राजस्थान का विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री गहलोत ने ही नेतृत्व में लड़ा जाएगा। यह सचिन पायलट गुट के लिए बड़ा झटका है।  

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