राजस्थान में विधानसभा चुनाव से एक साल पहले मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा तेज है। इसी बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक कार्यक्रम में दार्शनिक अंदाज में दिखे। सीएम गहलोत ने कहा कि न तो मुझे राज्य की कामना है, न स्वर्ग की, ना ही पुनर्जन्म की। मैं केवल दु:ख से संतप्त प्राणि हूं, जो दु:ख के समाप्त होने की कामना करता हूं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि न मैंने जमीन खरीदी, न एक ग्राम सोना, न चांदी। उन्होंने कहा कि विधायक और सांसद को जो सरकारी फंड मिलते हैं, वही मेरे पास है। मुझे याद है कि मैंने 40 साल पहले किश्तों पर हाउसिंग बोर्ड का एक मकान मानसरोवर में लिया था। जहां रह नहीं सकता, अब भी रहने लायक नहीं है। उस जमाने में मैंने 90 हजार रुपए किश्तों में भरे।
अशोक गहलोत ने कहा कि दिल्ली में 9-10 लाख रुपए 20 साल तक किश्तों में भरकर एक मकान लिया। वो भी 13 हजार रुपए के किराए पर उठा हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके पास दो प्लॉट खाली हैं, बाकी मैंने कुछ किया ही नहीं और नहीं मुझे कभी इन चीजों का शौक रहा कि मेरे पास बड़े बंगले हो या लग्जरी गाड़ियां। मैं सादगी भरा जीवन जीने में यकीन करता हूं।
उन्होंने कहा कि मुझसे लोग पूछते हैं कि आप इतने साधारण कैसे रहते हैं तो मैं बताता हूं कि सामान्य जीवन जीना ही हमें सीखाया गया है। मैं जनसेवा के लिए हमेशा तैयार रहता हूं। कुछ लोग हमें यहां तक कहते हैं कि आप सात पीढ़ियों का इंतजाम क्यों नहीं कर लेते लेकिन ऐसी बात मेरे दिमाग में आज तक नहीं आई। मैं तो अपनी जिंदगी उसी ढंग से बिताना चाहता हूं, जो आज तक बिताता रहा है।