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कभी चंबल में इनके नाम से कांपते थे लोग, अब बचाएंगे पर्यावरण को

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कभी चंबल के बीहडों में जिन डकैतों की हुकुमत चलती थी, जिनके नाम से ही लोग कांप जाते थे आज उन्होंने हथियारों को रखकर एक ऐसे काम का बीड़ा उठाया है कि हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है।
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कभी खुद को चंबल का बागी कहने वाले ये पूर्व डकैत अब पर्यावरण बचाने के लिए एकजुट हुए हैं। सालों पहले अपने हथियार त्यागने वाले ये लोग अब उन्हीं जंगलों और पर्यावरण को बचाने की मुहिम छेड़े हुए हैं जहां कभी इनके ठिकाने हुए करते थे।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार सीमा परिहार, गब्बर सिंह, मोहर सिंह, सारू सिंह, मलखान सिंह, रेनू यादव और सरला यादव आगामी जुलाई के मध्य में एक बार फिर इकट्ठा होकर लोगों की सुर्खियां बटोरेंगे।
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मौका होगा एक 'महाकुंभ' का जिसमें चंबल के पूर्व डकैत और उनके परिवार एक साथ शामिल होंगे। महाकुंभ का मुख्य उद्देश्य ''पहले बसाया बीहड़, अब बचाएंगे बीहड़'' है, जो जंगल की रक्षा करना चाहते हैं।
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लोगों से करेंगे पर्यावरण बचाने की अपील

ये सारे डकैत वो हैं जो 70-80 के दशक में कभी मध्यप्रदेश, राजस्‍थान और उत्तर प्रदेश के बीहड़ में पुलिस को छकाया करते थे और पुलिस इन्हें कभी छू भी नहीं पाई। अब ये सभी हथियार छोड़कर एक सामान्य जीवन जी रहे हैं।

अब सभी एकजुट होकर आम जनता और सरकारों से इस बात की अपील करते दिखेंगे कि पेड़ पौधों के जंगल की ओर बढ़ते कंक्रीट के जंगल पर लगाम लगाई जाए, जिससे पर्यावरण को संरक्षण मिल सके।

बीहड़ में पर्यावरण संरक्षण की मुहिम छेड़े हुए कल्पतरू संस्‍थान के विष्‍णु लांबा बताते हैं कि, मैंने मुरैना, भिंड, झांसी औरया और तीनों राज्यों के अन्य इलाकों में जाकर इन पूर्व डकैतों को खोजा।
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पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से जुड़कर करेंगे जागरूक

इनमें से लगभग 22 डकैतों से मिला जिन्होंने पर्यावरण बचाने की मुहिम में साथ देने का वादा किया। वहीं सात अन्य डकैत भी इस मुद्दे पर अपनी सहमति दे चुके हैं। जिनमें सीमा परिहार, मलखान सिंह और मोहर सिंह जैसे नाम शामिल हैं।
 
उन्होंने बताया कि जो डकैत महाकुंभ में शामिल होंगे वे इस बार एक नेक अभियान के लिए हथियार उठाएंगे न कि खुद के लिए। इसके तहत एक अभियान चलाया जाएगा‌ जिससे लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लाई जा सके।

वैसे इनमें से काफी डकैत ऐसे हैं जो आत्मसमर्पण करने के बाद सामाजिक परोपकारों के काम से जुड़ गए या कई ने राजनीति की ओर रुख कर लिया। वहीं पर्यावरण संरक्षण की मुहिम के दौरान इनमें से ये लोग आम जनता से अपनी कहानियों के द्वारा भी उन्हें समझाने और जागरूक करने का प्रयास करेंगे।
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