तीन साल पहले केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री कैलाश चौधरी और आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल पर जानलेवा हमला किया गया था। इस मामले में अब लोकसभा की विशेषाधिकार समिति के निर्देश पर बायतु पुलिस ने तत्कालीन राजस्व मंत्री हरीश चौधरी समेत कई अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है।
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार 12 नवंबर 2019 को केंद्रीय राज्य मंत्री कैलाश चौधरी और नागौर सांसद बेनीवाल तेजाजी के धार्मिक उत्सव में भाग लेने बायतु जा रहे थे। इस दौरान 100 से अधिक लोगों ने कैलाश चौधरी और हनुमान बेनीवाल के काफिले पर हमला कर दिया था। बेनीवाल ने आरोप लगाया था कि जान से मारने की नीयत से हमलावरों ने फायर भी किया। जिससे उनके वाहनों के कांच टूट गए। सुरक्षाकर्मियों की तत्परता से दोनों नेताओं की जान बची।
बेनीवाल ने हमले का आरोप तत्कालीन मंत्री हरीश चौधरी पर लगाया। उन्होंने बताया कि हरीश चौधरी उनके राजनीतिक विरोधी है। यह कार्यक्रम हरीश चौधरी के क्षेत्र में होना था। जिसके चलते बौखलाहट में उन्होंने सुनियोजित तरीके से अपने भाई और अन्य से पुलिस की मौजूदगी में हमला करवा दिया। इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके चलते बेनीवाल ने लोकसभा की विशेषाधिकार समिति में इस मामले को पेश किया।
समिति में करीब तीन साल तक सुनवाई चली। जिसके बाद गत 23 सितंबर को राजस्थान की मुख्य सचिव ऊषा शर्मा को आदेश दिया कि सात दिन में बेनीवाल की रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज की जाएग। इसके साथ ही इसकी सूचना समिति को भेजी जाए। हनुमान बेनीवाल का आरोप है कि निर्देश के बावजूद सात दिन की बजाय करीब 18 दिन में मुकदमा दर्ज कर संसद का अपमान किया गया है।
सासंद हनुमान बेनीवाल का कहना है कि हमपर जानलेवा हमला हुआ। गाड़ियों पर फायरिंग की गई। फिर भी पुलिस ने आईपीसी की धारा 307, आर्म्स एक्ट मुकदमे में नहीं लगाया है। इससे साफ पता चलता है कि पुलिस हरीश चौधरी और अन्य हमलावरों को बचाने का प्रयास कर रही है।