बूंदी जिले के हिंडोली विधानसभा क्षेत्र में युवा नेता नरेश मीणा एक बार फिर समर्थकों के बीच पहुंचे। रोशनदा गांव में तेजाजी महाराज के मंदिर परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में नरेश मीणा ने शिरकत की और मंच से आमजन को संबोधित किया। उनके कार्यक्रम में पहुंचते ही बड़ी संख्या में युवा और समर्थक जुट गए। इस दौरान युवाओं ने नरेश मीणा को कंधों पर उठा लिया। कार्यक्रम स्थल पर काफी देर तक उनके समर्थन में नारेबाजी और भीड़ का माहौल बना रहा।
जेल से बाहर आने के बाद हिंडोली क्षेत्र में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करने पहुंचे नरेश मीणा के इस कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से भी देखा जा रहा है। खासतौर पर इसलिए कि उन्होंने अपने संबोधन में आगामी पंचायत राज चुनावों को लेकर अपनी रणनीति खुलकर सामने रखी। नरेश मीणा ने कहा कि हाल ही में हुए नगर निकाय चुनाव में जिस तरह बारां में उन्हें और उनके समर्थकों को जनता का समर्थन मिला, उसके बाद अब उनकी नजर पंचायत राज चुनाव पर है। उन्होंने मंच से कहा कि बारां और बूंदी जिले में पंचायत राज चुनाव के दौरान प्रत्याशी उतारने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला जनता के समर्थन और आशीर्वाद के आधार पर लिया जाएगा। नरेश मीणा ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से हाथ उठवाकर पूछा कि क्या पंचायत राज चुनाव लड़ना चाहिए। उनके सवाल पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुषों ने हाथ उठाकर समर्थन जताया।
नगर निकाय चुनाव के बाद अब पंचायत चुनाव की तैयारी
नरेश मीणा ने अपने संबोधन में नगर निकाय चुनाव को आगे की राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए कहा कि निकाय चुनाव में मिली सफलता के बाद अब वह पंचायत राज चुनाव को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह बारां और बूंदी जिले में पंचायत राज चुनाव में अपने समर्थित उम्मीदवार उतारने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास बहुत ज्यादा संसाधन और चुनावी खर्च नहीं है। ऐसे में वह हर जगह उम्मीदवार उतारने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने सीमित क्षेत्रों में ही प्रत्याशी मैदान में उतारने की बात कही। नरेश मीणा ने कहा कि अगर जनता उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहती है और उम्मीदवारों को समर्थन देने का भरोसा देती है, तभी वह पंचायत चुनाव में उतरेंगे। उन्होंने मंच पर मौजूद लोगों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि जिन प्रत्याशियों को उनके समर्थन की जरूरत होगी, उन्हें जनता के बीच भेजा जाएगा और यदि जनता उनका साथ देती है तो उन्हें चुनाव लड़ाया जाएगा।
2028 के विधानसभा चुनाव को बताया 'टेस्ट पेपर'
अपने भाषण में नरेश मीणा ने पंचायत चुनाव को वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा किसी बड़े कंपटीशन की तैयारी करता है तो बीच में कई बार टेस्ट पेपर देता है। उसी तरह पंचायत राज चुनाव भी उनके लिए वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव का एक तरह का 'टेस्ट पेपर' होगा। उन्होंने कहा कि यदि पंचायत चुनाव में जनता का अच्छा समर्थन मिलता है तो वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में वह मजबूती से मैदान में उतरने और जनता की आवाज बनने की कोशिश करेंगे। इस दौरान उन्होंने बारां और बूंदी में संगठन को मजबूत करने तथा स्थानीय स्तर पर समर्थकों को चुनाव मैदान में उतारने के संकेत दिए। उनके इस बयान को आगामी पंचायत चुनावों से पहले राजनीतिक गतिविधियों के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है।
मंच से चुनावी संदेश, कांग्रेस-भाजपा पर निशाना
नरेश मीणा ने अपने संबोधन में कांग्रेस और भाजपा दोनों पर निशाना साधा। हालांकि, उन्होंने हिंडोली के पूर्व विधायक अशोक चांदना का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनका पूरा संबोधन क्षेत्र की राजनीति और आगामी चुनावों के इर्द-गिर्द रहा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के खिलाफ जनता में नाराजगी है और हाड़ौती की जनता मिलकर राजनीतिक बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि यदि जनता एकजुट होकर फैसला करती है तो बड़े राजनीतिक चेहरों को भी चुनौती दी जा सकती है। नरेश मीणा ने कहा कि उनके पास अभी ज्यादा ताकत या संसाधन नहीं हैं, लेकिन जनता का समर्थन उनके लिए सबसे बड़ा आधार है। उन्होंने कहा कि वह लोगों के बीच जाकर उनका आशीर्वाद मांग रहे हैं।
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'जनता की आवाज उठाना भारी पड़ रहा है'
अपने संबोधन के दौरान नरेश मीणा ने जेल में बिताए समय का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज उठाने की कीमत उन्हें जेल में रहकर चुकानी पड़ रही है। नरेश मीणा ने मंच से कहा, "जनता की आवाज उठाना मुझे भारी पड़ रहा है, कब तक जेल में डालोगे, कब तक डालते रहोगे?" उन्होंने कहा कि जेल जाने के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ और वह जनता के बीच अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि जेल में लंबे समय तक रहने के बाद वह झुक जाएंगे या माफी मांग लेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने अपने संबोधन में जेल के अनुभव को जनता के साथ अपने राजनीतिक संघर्ष से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।
हिंडोली में युवाओं की भीड़ ने खींचा ध्यान
रोशनदा गांव में आयोजित कार्यक्रम में नरेश मीणा के पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में युवा उनके आसपास जमा हो गए। कार्यक्रम के दौरान समर्थकों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया। मंच तक पहुंचने के दौरान भी युवाओं में उत्साह नजर आया। जेल से बाहर आने के बाद हिंडोली क्षेत्र में उनका यह सार्वजनिक संबोधन इसलिए भी चर्चा में रहा, क्योंकि यह क्षेत्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अशोक चांदना का राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है। इससे पहले नरेश मीणा हिंडोली में अशोक चांदना के सामने वर्ष 2028 का विधानसभा चुनाव लड़ने की बात भी कह चुके हैं। हालांकि, इस कार्यक्रम में उन्होंने अशोक चांदना का नाम नहीं लिया और अपने भाषण का फोकस कांग्रेस-भाजपा की राजनीति, जनता के समर्थन और आगामी पंचायत चुनावों पर रखा।
बूंदी में संगठन विस्तार का संकेत
नरेश मीणा ने कहा कि वह बारां और बूंदी में पंचायत राज चुनावों में उम्मीदवार उतारने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए जनता की राय और समर्थन सबसे महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने मंच पर मौजूद लोगों से हाथ उठवाकर समर्थन भी मांगा। बड़ी संख्या में लोगों द्वारा हाथ उठाए जाने के बाद उन्होंने कहा कि अब उन्हें जनता के भरोसे का अहसास हो रहा है। उन्होंने समर्थकों से कहा कि यदि जनता उनके साथ खड़ी रहती है तो वह सीमित संसाधनों के बावजूद चुनावी मैदान में उतरने का प्रयास करेंगे। उनके इस बयान से संकेत मिलते हैं कि नगर निकाय चुनाव के बाद अब उनका फोकस पंचायत राज चुनावों पर है। स्थानीय स्तर पर समर्थकों और संभावित प्रत्याशियों को जोड़कर संगठन खड़ा करने की दिशा में भी वह आगे बढ़ सकते हैं।