खारिया गांव में रहने वाले 22 साल के ओमप्रकाश जाट और 23 साल की गंगा चोटिया सगे भाई बहन है। 6-7 साल की उम्र में उनकी दोनों की मां का निधन हो गया। घर की आर्थिक स्थित भी ज्यादा ठीक नहीं थी। पिता चंपा राम मजदूरी पर परिवार का पालन पोषण करते थे। इसके बाद भी किसी ने हिम्मत नहीं हारी। पिता ने मजदूरी से होने वाली कमाई से दोनों बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और बच्चों ने भी पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोड़ी।
दोनों भाई बहनों ने हनुमान नगर व श्री बालाजी के सरकारी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद नागौर कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। दोनों बहन भाई ने मन में ठान लिया था कि उन्हें सरकारी शिक्षक ही बनना है, लेकिन गरीबी यहां भी बाधा बनी। पिता की कमाई इतनी नहीं थी कि उन्हें रीट की तैयारी के लिए कोचिंग सकें।
ऐसे में दोनों भाई-बहन ने किताबों का एक सेट खरीदा और उसी से पढ़ाई शुरू की। दोनों रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई करते थे। इसका नतीजा यह रहा कि बीते रविवार को जारी हुई रीट लेवल-वन की कटऑफ में दोनों का चयन हो गया। दोनों भाई-बहन खारिया गांव के पहले शिक्षक हैं। पढ़ाई के दौरान उनके पति को ताने मारने वाले लोग आज उन्हें बधाई दे रहे हैं।
पढ़ाई से लेकर नौकरी सब साथ-साथ
गंगा और ओमप्रकाश कक्षा 12वीं तक एक साथ एक ही क्लास पढ़े। दोनों ने बीएसटीसी भी एक साथ की। दो साल तक रीट की परीक्षा के लिए तैयारी भी दोनों ने मिलकर की और जब परिणाम आया तो दोनों को 143-143 अंक मिले। अब दोनों भाई बहन एक साथ शिक्षक भी बन गए हैं।
रीट परीक्षा से दो महीने पहले दादा की हुई मौत
पुराने दिनों को याद करते हुए ओम प्रकाश ने बताया कि मां के निधन के समय गंगा सात साल की थी। मां के जाने के बाद उसने रसोई की जिम्मेदारी उठा ली थी। वह खाना बनाती और मैं बर्तन धोता था। पिता चंपा राम घर चलाने के लिए खेतों में मजदूरी करते थे।
घर खर्च और हमें पढ़ाई के लिए उन्होंने ड्राइवर की नौकरी कर ली। कुछ दिन बाद जीप खरीदकर बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने लगे। ओम प्रकाश ने बताया कि रीट परीक्षा से दो महीने पहले दादा की मौत हो गई थी। इससे पहले दादा ने एक दिन कहा था, मेहनत करो दोनों एक दिन जरूर सफल होगे।
स्नातक करने और शिक्षक बनने वाली गांव की पहली बेटी गंगा
खारिया गांव में शिक्षा का स्तर ऐसा है कि यहां बेटियों को तो पढ़ाया ही नहीं जाता है। गंगा गांव की ऐसी पहली बेटी है जिसने बीए तक की पढ़ाई की है और अब शिक्षक बनकर गांव का नाम रोशन किया है। अपनी कामयाबी का श्रये गंगा अपने पिता के त्याग और संघर्ष को देती है।