देश में केंद्र के नए कृषि कानून के खिलाफ किसान दिल्ली बॉर्डर पर लगातर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में किसानों की मांग है कि सरकार इस नए कानून को वापस ले। इस आंदोलन को रोकने के लिए सरकार ने किसानों के साथ कई बार बैठक की, लेकिन इसमें कोई नतीजा नहीं निकला। सरकार इन कानूनों को लागू करने पर अड़ी हुई है। वहीं, किसान भी अपनी मांगों से पीछे नहीं हट रहे हैं।
केंद्र सरकार के द्वारा लागू किए गए नए कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद करने का ऐलान कर दिया है, जिसका समर्थन सभी विपक्षी राजनीतिक दल कर रहे हैं। इसी बीच एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ( आरएलपी) ने भी किसानों के भारत बंद के ऐलान का समर्थन किया है। राजस्थान के नागौर जिले से सांसद और आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ है। उन्होंने केंद्र से तीनों कृषि कानून वापस लेने को कहा है।
गृह मंत्रालय को लिखी थी चिट्ठी
हम आपको बता दें कि हनुमान बेनीवाल ने गृहमंत्री अमित शाह को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने नए कृषि कानूनों को वापस लेने को कहा था। बेनीवाल ने कहा कि अगर सरकार इन कानूनों को वापस नहीं लेगी तो वह एनडीए के साथ बने रहने पर फिर से विचार करेंगे।
भाजपा के नेताओं ने आरएलपी के खिलाफ खोला मोर्चा
इस चिट्ठी के बाद राजस्थान में बीजेपी के कई नेताओं ने हनुमान बेनीवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी माने जाने वाले प्रताप सिंह सिंघवा, बवानी सिंह राजावत, प्रहृलाद गुंजल ने गृहमंत्री अमित शाह को एक चिट्ठी लिखी। इस चिट्ठी में इन नेताओं ने कहा कि आरएलपी का नेतृत्व करने वाले हनुमान बेनीवाल के साथ बीजेपी को गठबंधन रखने की जरूरत नहीं है। आरएलपी आज ही इस गठबंधन को छोड़ सकती है।
2019 में भाजपा ने किया था गठबंधन
राजस्थान के राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बाजेपी ने हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी से वसुंधरा राजे की रजामंदी न होने के बावजूद किया था। हनुमान बेनीवाल और वसुंधरा राजे दोनों राजनितिक प्रतिद्वंदी है और बेनीवाल वसुंधरा राजे को लेकर कई बार टिप्पणी कर चुके हैं।
विपक्षी दलों समेत बैंक यूनियन भी कर रहे किसानों का समर्थन
बता दें कि किसान की ओर से बुलाए गए भारत बंद का समर्थन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, पीएजीडी, एसीपी, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई (एलएल), आरएसपी, आम आदमी पार्टी, शिवसेना समेत अन्य विपक्षी दल कर रहे हैं। इसके अलावा कई बैंक यूनियन भी कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में उतर आए हैं।