पीएम मोदी से मिलने पहुंचीं सुमित्रा देवी
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स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद सुमित्रा ने 50,000 रुपये और फिर “एकता शक्ति क्लस्टर लेवल फेडरेशन, पांचू” से 1 लाख रुपये का ऋण लेकर सिलाई मशीन खरीदी। इसके बाद उन्होंने बैग, पर्स और लकड़ी की कलात्मक वस्तुएं बनानी शुरू कीं। वर्ष 2022 में बीकानेर के ग्रामीण हाट में स्टॉल मिलने के बाद उनके उत्पादों को बड़ा मंच मिला और उन्होंने शहरी बाजार में भी कदम रखा।
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आज उनकी मासिक आय करीब 25,000 रुपये है और वे राज्यभर से ऑनलाइन ऑर्डर प्राप्त कर रही हैं। सुमित्रा देवी न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत हैं। जिला परियोजना प्रबंधक दिनेश मिश्रा के अनुसार, सुमित्रा की सफलता राजीविका जैसी योजनाओं की असली ताकत को दर्शाती है।