राजस्थान सरकार ने पश्चिमी राजस्थान में कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत 1,274.26 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की है। इस राशि से परियोजना क्षेत्र में 8,746 एमसीएफटी की कुल क्षमता वाले चार एस्केप रिजर्वायर विकसित किए जाएंगे। यह कदम रेगिस्तानी इलाकों में गिरते भूजल स्तर और कम वर्षा की चुनौती के बीच किसानों को नहरी पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
8,746 एमसीएफटी जल का संचयन संभव
इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत एस्केप रिजर्वायरों का विकास आरडी 507, आरडी 750, आरडी 1121 और आरडी 1356 पर किया जाना प्रस्तावित है। इन चारों स्थानों पर रिजर्वायर बनने से 8,746 एमसीएफटी जल का संचयन संभव हो सकेगा। अतिरिक्त जल को सुरक्षित रखने से आपात स्थिति और आवश्यकता के समय फसलों की सिंचाई के लिए पानी आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही विभिन्न नहरी प्रणालियों जैसे सागरमल गोपा शाखा, बाबा रामदेव उपशाखा, फलोदी लिफ्ट नहर, मुख्य नहर के दोनों पटड़ों, बाबा रामदेव शाखा, कोलायत वितरिका और खिदरत वितरिका के सुदृढ़ीकरण एवं जीर्णोद्धार के काम भी तेजी से कराए जा रहे हैं।
नहरी तंत्र और जीर्णोद्धार कार्य
सिंचाई व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए बजट घोषणा 2024-25 और 2025-26 के अंतर्गत 2,20,377 हेक्टेयर क्षेत्र में खालों के जीर्णोद्धार का कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त 1,18,248 हेक्टेयर क्षेत्र में स्प्रिंकलर सिंचाई सुविधा स्थापित करने के लिए कार्य प्रगतिरत हैं। खालों और वाटर कोर्स के सुदृढ़ीकरण से अंतिम छोर तक पानी की बर्बादी रुकेगी और कृषि क्षेत्र को पर्याप्त जल मिल सकेगा। इन सभी निर्माण एवं मरम्मत कार्यों से क्षेत्र के कृषि ढांचे का कायाकल्प हो रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी संबल मिल रहा है।
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नए बजट में अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान
वर्ष 2026-27 के बजट में भी सिंचाई तंत्र को आधुनिक बनाने के लिए 550 करोड़ रुपये के नए कार्यों की घोषणा की गई है। इसके तहत 33,543 हेक्टेयर क्षेत्र में खालों के जीर्णोद्धार के अलावा सागरमल गोपा शाखा पर बैलेंसिंग रिजर्वायर का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही गजनेर लिफ्ट नहर और कोलायत लिफ्ट नहर का जीर्णोद्धार भी इस राशि से संपन्न होगा। इंदिरा गांधी नहर न केवल पश्चिमी, उत्तरी और मध्य राजस्थान के 13 जिलों में पेयजल की आपूर्ति करती है, बल्कि यह सीमा सुरक्षा बल, भारतीय सेना, ऊर्जा और औद्योगिक परियोजनाओं की जल आवश्यकताओं को पूरा करने का मुख्य आधार भी है।