भीलवाड़ा में नगर निगम गठित होने के बाद हुए पहले चुनाव में सभी 70 वार्डों के परिणाम घोषित हो गए हैं। भाजपा ने 45 वार्डों में जीत दर्ज कर नगर निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस को 10 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 15 वार्डों में जीत मिली है। बहुमत के लिए जरूरी 36 सीटों के मुकाबले भाजपा नौ सीट आगे रही।
मतगणना के दौरान भाजपा ने शुरुआत से बढ़त बनाए रखी और अंतिम परिणाम आने तक यह बढ़त स्पष्ट बहुमत में बदल गई। 70 सदस्यीय निगम में भाजपा को 45 सीटें यानी 64.29 प्रतिशत सीटें मिली हैं। कांग्रेस का सीट शेयर 14.29 प्रतिशत और निर्दलीयों का 21.43 प्रतिशत रहा।
कांग्रेस से 35 सीट आगे रही भाजपा
अंतिम परिणाम में भाजपा और कांग्रेस के बीच बड़ा अंतर सामने आया। भाजपा ने कांग्रेस से 35 सीट अधिक जीतीं हैं। वहीं 15 निर्दलीय पार्षदों की जीत ने स्थानीय चुनाव में स्वतंत्र प्रत्याशियों की मजबूत मौजूदगी भी दर्ज कराई है। भाजपा के विजयी वार्डों में 2, 3, 5, 6, 8, 9, 11, 13, 15, 16, 17, 18, 20, 21, 22, 25, 26, 28, 29, 30, 31, 32, 33, 34, 36, 37, 38, 42, 43, 44, 48, 52, 53, 54, 57, 58, 59, 60, 61, 62, 63, 64, 66, 67 और 70 शामिल हैं। कांग्रेस ने वार्ड 1, 4, 23, 24, 27, 40, 47, 49, 55 और 68 में जीत दर्ज की। निर्दलीय प्रत्याशियों ने वार्ड 7, 10, 12, 14, 19, 35, 39, 41, 45, 46, 50, 51, 56, 65 और 69 में जीत हासिल की।
वार्ड 9 में सबसे बड़ी जीत, वार्ड 7 में सबसे करीबी मुकाबला
भाजपा की जसवंत कंवर ने वार्ड 9 में 2165 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। यह अब तक सबसे बड़ी जीत है। वहीं वार्ड 7 में निर्दलीय इंदु टांक ने महज छह मतों के अंतर से जीत हासिल की। वार्ड 52 में भाजपा के रमेश चन्द्र खोड़िवाल ने 23 मतों से जीत दर्ज की। ये दोनों मुकाबले बेहद करीबी रहे।
नौ वार्डों में 1000 से ज्यादा मतों का अंतर
बड़े अंतर से जीत दर्ज करने वाले प्रमुख प्रत्याशियों में वार्ड 22 की भाजपा प्रत्याशी सीमा कंवर 1959 मत, वार्ड 60 की सुमन ओझा 1893 मत, वार्ड 54 के नारायण गुर्जर 1306 मत, वार्ड 33 की नेहा जोशी 1283 मत, वार्ड 47 के कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद उस्मान पठान 1205 मत, वार्ड 63 के भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह राठौड़ 1109 मत, वार्ड 58 के सुभाष सोनी 1081 मत और वार्ड 57 की संजना खटीक 1049 मत के अंतर से विजयी रहे। चुनाव परिणाम में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व सभापति मंजू पोखरना को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के शंकर जाट ने उन्हें पराजित किया। शंकर जाट को 1870 और मंजू पोखरना को 644 मत मिले। कांग्रेस के शहर अध्यक्ष शिवराम खटीक की पत्नी और पूर्व नेता प्रतिपक्ष समदूदेवी भी चुनाव हार गईं। उन्हें भाजपा के मंडल अध्यक्ष रमेश कोईवाल ने हराया। समदूदेवी के भाई उमेश खटीक को भी हार का सामना करना पड़ा।
भाजपा के सामने अब सभापति का चुनाव
भाजपा के 45 पार्षद निर्वाचित होने के बाद निगम में सभापति पद को लेकर तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। पार्टी के पास बहुमत से नौ अधिक सीटें हैं। ऐसे में सभापति के चुनाव के लिए उसे निर्दलीय पार्षदों के समर्थन पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि 15 निर्दलीय पार्षदों की मौजूदगी निगम की आगामी राजनीति में महत्वपूर्ण रहेगी। सभापति पद के लिए भाजपा किस चेहरे को आगे करती है, इस पर अब राजनीतिक निगाहें टिक गई हैं।
70 वार्डों का अंतिम गणित
दल सीटें सीट प्रतिशत
- भाजपा 45 64.29 प्रतिशत
- कांग्रेस 10 14.29 प्रतिशत
सबसे ज्यादा मतदान वाले वार्ड
वार्ड 1 - 79.66 प्रतिशत
वार्ड 3 - 79.17 प्रतिशत
वार्ड 26 - 77.52 प्रतिशत
वार्ड 70 - 77.38 प्रतिशत
वार्ड 2 - 76.69 प्रतिशत
वार्ड 24 - 75.49 प्रतिशत
ये भी पढृें: राजस्थान निकाय चुनाव परिणाम: जयपुर से जोधपुर तक दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर, अजमेर की क्या रहेगी स्थिति?
सबसे कम मतदान वाले वार्ड
वार्ड 60 - 49.63 प्रतिशत
वार्ड 66 - 49.99 प्रतिशत
वार्ड 8 - 52.25 प्रतिशत
वार्ड 67 - 52.53 प्रतिशत
वार्ड 61 - 53.54 प्रतिशत
वार्ड 44 - 53.70 प्रतिशत
2021 के मुकाबले 3.29 प्रतिशत कम मतदान
भीलवाड़ा नगर निगम के वर्ष 2021 के चुनाव में 67.13 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार यह आंकड़ा घटकर 63.84 प्रतिशत रह गया। यानी पांच साल बाद हुए नगर निगम चुनाव में मतदान प्रतिशत में 3.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस लिहाज से इस बार मतदाताओं का मतदान के प्रति उत्साह पिछले चुनाव की तुलना में कम दिखाई दिया।
सड़क, नाली, सफाई और पेयजल रहे प्रमुख मुद्दे
नगर निगम चुनाव के दौरान शहर में कई स्थानीय मुद्दे प्रमुखता से उठे। इनमें सड़क, नाली, सफाई व्यवस्था, सीवरेज, पेयजल, बिजली, जलभराव, यातायात व्यवस्था और अतिक्रमण जैसे मुद्दे शामिल रहे।
शहर के कई हिस्सों में खराब सड़कों और नालियों की समस्या को लेकर मतदाताओं में नाराजगी दिखाई दी। सफाई व्यवस्था और कचरा निस्तारण भी चुनावी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति, शहर में बढ़ता यातायात दबाव और पार्किंग की समस्या भी मतदाताओं के बीच चर्चा में रही। कई वार्डों में स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की स्थिति और पिछले बोर्ड के कामकाज को लेकर भी प्रत्याशियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप हुए। मतदाताओं के सामने वार्ड की मूलभूत सुविधाओं के साथ शहर के समग्र विकास का मुद्दा भी रहा।