सबसे पहले प्रशासन ने संक्रमित स्टाफ वाले अस्पताल को सील करवाया। 22 फरवरी से 19 मार्च तक आए मरीजों की सूची निकलवाई। 4 राज्यों के 36 व राजस्थान के 15 जिलों के 498 मरीज आए। इन सभी के कलेक्टर को सूचना देकर उन्हें आइसोलेट कराया। अस्पताल के 253 स्टाफ व जिले के 7 हजार मरीजों की स्क्रीनिंग की।
पहली बार 25 लाख की स्क्रीनिंग
भीलवाड़ा जिले में देश की सबसे बड़ी 25 लाख लोगों की स्क्रीनिंग कराई गई। छह हजार कर्मचारी जुटे। मरीजों के संपर्क में आए लोगों की पहचान की। 7 हजार से अधिक संदिग्ध होम क्वारंटीन में रखे। एक हजार को 24 होटलों, रिसोर्ट व धर्मशालाओं में क्वारंटीन किया।
सर्वे की जिम्मेदारी चिकित्सा विभाग की थी। गांवों में फील्ड सर्वे की जिम्मेदारी एडीएम राकेश कुमार को दी गई। यह बड़ी चुनौती थी। कोर टीम रात तीन बजे तक संबंधित एसडीएम से डाटा कलेक्शन कर कंपाइल करती। अगले दिन सुबह होते ही कलेक्टर की टेबल पर रिपोर्ट होती। इसी आधार पर तय होती थी अगली रणनीति।
आइसोलेशन वार्ड बदलते रहे स्टाफ
जिले के राजकीय अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए बनाया आइसोलेशन वार्ड। इसमें कार्यरत डॉक्टर्स व मेडिकल स्टाफ की हर सप्ताह ड्यूटी बदली। वे कोरोना से संक्रमित न हों, इसलिए सात दिन की ड्यूटी के बाद उन्हें भी 14 दिन क्वारंटीन में रखा। नतीजा, अब तक 69 स्टाफ में से एक भी संक्रमित नहीं हुआ।
छह पॉजीटिव केस आते ही 20 मार्च को भीलवाड़ा शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया। फिर 14 दिन बाद 3 से 13 अप्रैल तक दस दिन के लिए महाकर्फ्यू। ऐसा करना जरूरी था, ताकि लोग घरों में ही रहें। वायरस का सामुदायिक प्रसार न हो।
जहां कोरोना मरीज, वहां कर्फ्यू
जिले के ग्रामीण क्षेत्र या गांव का व्यक्ति कोरोना से संक्रमित मिला, उस गांव या क्षेत्र को सेंटर प्वाइंट मानते हुए एक किमी की परिधि को नो मूवमेंट जोन घोषित कर दिया यानि वहां कर्फ्यू भी लगाया।
जिले की सीमाएं सील...
प्रशासन ने जिले की सीमाएं सील कर दीं। 20 चेक पोस्ट बनाकर कर्मचारी तैनात कर दिए, ताकि न कोई बाहर से आ सके, न जिले से बाहर जा सके।
शहर व जिले में रोडवेज व प्राइवेट बसें सहित सभी तरह के वाहन व ट्रेन भी बंद करवाए। संक्रमित आ-जा न सके।
राशन वितरण
कर्फ्यू में लोगों को खाने-पीने का सामान भी मिलता रहे। इसके लिए सहकारी भंडार के जरिये वाहनों से घर-घर राशन सामग्री, फल-सब्जियां व डेयरी के जरिये दूध पहुंचाया गया। श्रमिकों, असहाय व जरूरतमंदों को निशुल्क भोजन पैकेट व किराना सामान भेजा।
भीलवाड़ा में हमने पहले चरण में कोरोना से महायुद्ध जीत लिया है। अब तक 21 मरीज निगेटिव से पॉजिटिव हो गए। इनमें से 15 को घर भेज दिया गया। केंद्र सरकार ने हमारे लिए निर्णयों व रणनीति को मॉडल माना है। यह सब पूरी टीम के सहयोग से ही संभव हुआ। भीलवाड़ा की जनता का भी पूरा सहयोग मिला। अब महायुद्ध का दूसरा चरण है। इसे भी हम सब लोगों के सहयोग से जीतेंगे, ऐसा मुझे विश्वास है। -राजेंद्र भट्ट, जिला कलेक्टर