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Bharatpur News: बाघ करेंगे चीतलों का शिकार

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विचरण करते चीतल
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मनीष पवार
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भरतपुर। राजस्थान के टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक शिकार (भोजन) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना) से चीतलों के स्थानांतरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। बुधवार को 22 चीतल मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व भेजे गए। यह कार्य अफ्रीकी बोमा तकनीक की मदद से सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से किया गया।

घना के निदेशक मानस सिंह ने बताया कि मंगलवार रात बोमा तकनीक के जरिये 22 चीतल पकड़े गए थे, जिन्हें बुधवार सुबह मुकुंदरा भेजा गया। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में दो बड़े टाइगर रिजर्व मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी में 250-250 चीतल और भेजे जाएंगे। अब तक घना से 543 चीतल स्थानांतरित किए जा चुके हैं। इनमें 400 मुकुंदरा और 143 चीतल रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में छोड़े गए हैं।
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मानस सिंह ने बताया कि टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ उनके लिए पर्याप्त प्राकृतिक शिकार (प्रे बेस) की आवश्यकता महसूस की जा रही है। चीतल, बाघों का प्रमुख शिकार होते हैं। चीतलों की मौजूदगी से बाघों का शिकार व्यवहार स्वाभाविक बना रहेगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना भी कम होगी। इसके अलावा यह जैव विविधता को संतुलित रखने और पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी सहायक होगा।
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ये है अफ्रीकी बोमा तकनीक
चीतल अत्यंत सतर्क व संवेदनशील वन्यजीव हैं, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से पकड़ना मुश्किल होता है। इसलिए अफ्रीकी देशों में इस्तेमाल की जाने वाली बोमा तकनीक को अपनाया गया है। इसमें जंगल में झाड़ियों व पेड़ों के बीच लकड़ी, जाल व प्राकृतिक अवरोध से बाड़े बनाए जाते हैं। चीतलों के लिए इन बाड़ों में चारा डाला जाता है, जिससे वे धीरे-धीरे अंदर आते हैं। अंतिम घेरे में लगे दरवाजे से पिंजरे वाले ट्रक में चीतल स्वाभाविक रूप से पहुंच जाते हैं। पूरी प्रक्रिया में चीतलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता और ट्रांसफर सुरक्षित रहता है। संवाद
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