राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने सख्त नियम और बायोमेट्रिक सिस्टम लागू किया है लेकिन डमी उम्मीदवारों का खेल अब भी जारी है। हालांकि भीलवाड़ा पुलिस और प्रशासन की सजगता के चलते कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2025 में बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।
भीलवाड़ा के शास्त्री नगर रोड स्थित एसएमएम गर्ल्स सीनियर सेकंडरी स्कूल परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक जांच के दौरान धौलपुर से परीक्षा देने आया सुनील कुमार गुर्जर संदिग्ध पाया गया। जांच में सामने आया कि सुनील के फिंगर प्रिंट पहले से सिस्टम में दर्ज थे।
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भरतपुर पुलिस अधीक्षक दिगंत आनंद ने बताया कि 1 जून को हुई प्री-डीएलएड परीक्षा में सुनील ने दीपक गुर्जर की जगह डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा दी थी। उस समय गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई और दीपक परीक्षा पास हो गया लेकिन इस बार जब सुनील अपने ही नाम से परीक्षा देने आया तो सिस्टम ने पुराने रिकॉर्ड से उसका फिंगर प्रिंट मैच कर लिया और राज खुल गया।
परीक्षा केंद्र पर सख्त बायोमेट्रिक और फोटो वेरिफिकेशन लागू था। जैसे ही सुनील का फिंगर प्रिंट मैच हुआ, तुरंत चेतावनी मिली। पूछताछ में उसने कबूल किया कि गांव के हंसराज गुर्जर के कहने पर उसने जून में दीपक की जगह परीक्षा दी थी।
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भीलवाड़ा पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर सुनील को भरतपुर लाकर मथुरा गेट थाने में मामला दर्ज किया। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है।
सुनील ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया कि उसने तीन बार डमी बनकर परीक्षाएं दी हैं, जिनमें प्री-डीएलएड परीक्षा 2024, डी.एल.एड. परीक्षा 2025 और पशु परिचर परीक्षा 2024 शामिल हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि सुनील के पास मजबूत नेटवर्क था। पशु परिचर परीक्षा 2024 के लिए उसने 6 लाख, प्री-डीएलएड परीक्षा के लिए 25 हजार और कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2025 के लिए 25 हजार रुपये लिए थे।
आरोपी तकनीकी जानकारी रखता था और अभ्यर्थियों के आधार कार्ड में फोटो बदलकर फर्जी पहचान पत्र तैयार करता था। फोटो मिलान की वजह से अब तक वह पकड़ से बचा रहा।
गौरतलब है कि भर्ती परिक्षाओं में धांधली रोकने के लिए प्रदेश में अब नया डिजिटल डेटाबेस तैयार किया गया है, जिसमें प्रत्येक परीक्षार्थी की फोटो, फिंगर प्रिंट और पूरी परीक्षा हिस्ट्री दर्ज होगी। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के दौरान तुरंत जानकारी मिल जाएगी कि उम्मीदवार कब-कब और किन परीक्षाओं में शामिल हुआ। इससे डमी उम्मीदवार और नकल गिरोहों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी।