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Bharatpur News: हिंदी साहित्य समिति पर नीलामी का संकट

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 हिंदी साहित्य समिति का मुख्य द्वार
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भरतपुर। देश-विदेश में हिंदी की अलख जगाने वाली 112 वर्ष पुरानी हिंदी साहित्य समिति पर नीलामी का संकट मंडरा रहा है। राज्य सरकार की ओर से बजट नहीं मिल पाने की वजह से समिति वर्षों से आर्थिक संकट झेल रही है। वर्षों से समिति के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने की वजह से न्यायालय ने नीलामी का नोटिस भेजा है।
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हिंदी साहित्य समिति के लिपिक त्रिलोकीनाथ शर्मा ने बताया कि न्यायालय की ओर से नीलामी का नोटिस चस्पा किया गया है। कोर्ट ने नीलामी की तारीख 16 जनवरी तय की है। यदि उससे पहले 1 करोड़, 11 लाख, 94,942 रुपये अदा नहीं किए गए तो हिंदी साहित्य समिति की नीलामी कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि हिंदी साहित्य समिति में 6 कर्मचारी कार्यरत थे। इनमें से 4 सेवानिवृत्ति हो चुके हैं। वर्तमान में दो कर्मचारी कार्यरत हैं। इनको वर्ष 2003 से वेतन नहीं मिल पाया है। इसकी वजह से कर्मचारियों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। बताया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने हिंदी साहित्य समिति के लिए 5 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की थी, लेकिन दुर्भाग्य की बजट नहीं मिल सका।

बताया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने दो कर्मचारियों को वर्ष 2003 से अगस्त 2019 तक का आंशिक वेतन न्यायालय के माध्यम से दिया था। समिति को अब राज्य सरकार ने अपने अधीन ले लिया है। फिर भी कर्मचारियों का बकाया वेतन व अन्य कार्यों के लिए बजट उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसकी वजह से न्यायालय ने नीलामी के लिए नोटिस जारी किया है।
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समिति में है ज्ञान का भंडार
हिंदी साहित्य समिति की स्थापना 13 अगस्त 1912 को पूर्व राजमाता मांजी गिर्राज कौर की प्रेरणा से की गई थी। जिस समय पुस्तकालय शुरू किया गया था उस समय शहर के लोगों ने अपने घर से पांच-पांच पुस्तक लाकर यहां रखी थीं। फिलहाल समिति के पुस्तकालय में 44 विषयों की 33,363 पुस्तकें उपलब्ध हैं। इनमें 450 वर्ष पुरानी 1500 से अधिक बेशकीमती पांडुलिपियां भी शामिल हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2013 में समिति का दौरा किया था। उन्होंने यहां किताबों को देखकर तारीफ की थी। इस दौरान समिति को करीब 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी मिली, वह रुपया पत्थर लगाने के नाम पर खर्च कर दिया गया।


टैगोर ने यहीं लिखी थी नीलमणि
हिन्दी साहित्य समिति के समृद्ध ज्ञान की बदौलत यहां कई विभूतियों ने दौरा किया। इनमें विशेष नाम राष्ट्रगीत के रचयिता रविंद्रनाथ टैगौर का भी है। टैगौर ने हिंदी साहित्य समिति के भवन में नीलमणि लता नामक रचना लिखी थी। टैगौर यहां 17वें साहित्य सम्मेलन में शामिल होने आए थे। समिति से जुड़े लोग बताते हैं नीलमणि की रचना उन्होंने यहीं बैठकर की थी। इसका उल्लेख टैगौर की गीतांजलि में मिलता है। गीतांजलि में नीलमणि के लेखन के साथ भरतपुर का भी जिक्र किया गया है।


यह विभूतियां आ चुकी हैं यहां
- कवि गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगौर (1927)
- पंडित मदनमोहन मालवीय (1927)
- राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन (1927)
- सेठ गोविंददास (1927 एवं 1968)
- मोरारजी देसाई, जय प्रकाश नारायण, हरिभाऊ उपाध्याय, जैनेंद्र कुमार, मुराई नोविस्ता जापान, अली अहमद नाटककार पाकिस्तान, कमलारत्नम, वियोगी हरि, काका कालेलकर,
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रूस के हिंदी विद्वान डाॅ. बरान्निकोव, परिपूर्णानंद वर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िय़ा और डाॅ राम मनोहर लोहिया आदि।
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