वेदांता समूह चेयरमैन, अनिल अग्रवाल
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थार की सफलता आसाम में दोहराने की तैयारी, वेदांता चेयरमैन ने साझा किया विजन
थार रेगिस्तान के तेल क्षेत्रों ने जिस प्रकार स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान की, उसी तर्ज पर देश के नार्थ ईस्ट क्षेत्र में भी अन्वेषण बढ़ाया जा रहा है। वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने हाल में एडवांटेज आसाम कार्यक्रम के दौरान केयर्न की सफल एक्सप्लोरेशन गतिविधियों का उल्लेख करते हुए इस सेक्टर में विकास का विजन साझा किया।
उन्होंने बताया कि भूमि के ऊपर और भूमि के नीचे, दोनों तरफ प्रकृति ने प्राकृतिक संसाधनों के रूप में हमें उपहार प्रदान किये हैं। हर क्षेत्र में अब नवाचार हो रहा है। आसाम में भूमि के ऊपर चाय का उत्पादन जो पिछले 200 वर्षों से हो रहा है, वह भी आज नए बदलाव देख रहा है। वहां अब बड़े बागानों को छोड़कर छोटे बागान स्थापित हो रहे हैं। क्योंकि बड़े बागानों में दुनियाभर के नियम और परमिशन लेने की आवश्यकता होती है।
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भूमिगत संसाधनों के मामले में भी नवाचार होने चाहिए। आज समय आ गया है, जब अमेरिका की तर्ज पर कम से कम सौ उद्यमी मोबाइल ड्रिलिंग मशीनों का उपयोग कर छोटे स्थान पर ही ड्रिलिंग शुरू कर सकते हैं। वहां उन्हें मालूम होता है कि कहां तेल है। आगे की व्यवस्था सरकार करती है, ऑनलाइन आवेदन दिया जाता है, स्वीकृति मिलती है और फिर वे तेल का उत्पादन कर उसे रिफाइनरी को भेजते हैं। यह सपना मैं भारत के लिए भी देख रहा हूं।
उन्होंने आगे बताया कि केयर्न वेदांता असम में तीन स्थानों पर तेल का उत्पादन कर रही है। तीनों स्थानों पर हमें पहली बार सफलता मिली है और वहां से गैस निकालकर हम चाय बागानों को दे रहे हैं। इससे उनकी उत्पादकता बढ़ रही है। पहले वे कोयले का उपयोग करते थे, अब गैस का उपयोग कर रहे हैं। आज दुनिया में भूमिगत संसाधनों के माध्यम से उन्नति हो रही है। चाहे अमेरिका हो, ऑस्ट्रेलिया हो, मध्य पूर्व हो, और हिंदुस्तान में जैसी जियोलॉजी है, वह दुनिया में कहीं नहीं है।
साथ ही, हमने लोगों से आह्वान किया है कि डाउनस्ट्रीम उत्पादन में भाग लें, चाहे वह रिफाइनरी हो, मोबिल ऑयल हो, या गैस-आधारित उद्योग हों। यह साहसिक कार्य है और यह साहस हमें हमारे देश की लीडरशिप की ऊर्जा से मिला है। उन्होंने हमें जोखिम उठाना सिखाया है। ज्ञात रहे कि बाड़मेर में तेल उत्पादन में जुटी केयर्न ऑयल एंड गैस ने हाल ही में आसाम में हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज के लिए ड्रिलिंग शुरू की है। इसमें बाड़मेर के युवा उद्यमी और यहां की टेक्निकल टीम भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।